Uttarakhandतीर्थाटन

कोटद्वार में सुखरो देवी मंदिर की खुलेगी सील, कोर्ट ने चाबियां मंदिर समिति को सौंपने को कहा

एसडीएम के आदेश के अनुसार सीलिंग का चाबियां राजस्व निरीक्षक के कर दी गई थी सुपुर्द

Amit Bhatt, Dehradun: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार स्थित सुखरो देवी मंदिर प्रबंधन विवाद में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए एसडीएम को मंदिर के दो कमरों लाइब्रेरी रूम और स्टडी रूम की चाबियां समिति को सौंपने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति Alok Mahra की एकलपीठ ने पारित किया।

मामला क्रिमिनल मिसलेनियस आवेदन संख्या 1735/2025 से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता राजाराम अंथवाल ने राज्य सरकार, उपजिलाधिकारी, थाना प्रभारी और बश्वानंद खंतवाल को पक्षकार बनाया था।

अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एस.आर.एस. गिल ने पक्ष रखा, जबकि राज्य की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता राकेश जोशी उपस्थित रहे।

क्या था पूरा विवाद
हाईकोर्ट में दायर याचिका में 11 सितंबर 2025 को एसडीएम कोटद्वार की ओर से पारित आदेश और 19 सितंबर 2025 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कोटद्वार के आदेश को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने इन आदेशों को निरस्त करने की मांग की थी।

एसडीएम के आदेश के तहत मंदिर के लाइब्रेरी रूम, अध्ययन कक्ष, कार्यालय और दानपात्र (डोनेशन बॉक्स) को सील कर उसकी अभिरक्षा राजस्व निरीक्षक सुखरो को सौंप दी गई थी।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि एसडीएम अब लाइब्रेरी और स्टडी रूम की चाबियां समिति को सौंपने के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि जब चाबियां सौंपी जाएं, उस समय राजस्व उपनिरीक्षक सुखरो भी मौजूद रहें, ताकि कमरे के भीतर रखे सामान का मिलान सूची (इन्वेंटरी) से कराया जा सके।

अदालत ने क्या कहा
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि चाबियां सौंपते समय संबंधित एसडीएम अथवा तहसीलदार मौके पर उपस्थित रहें और कमरों के भीतर रखे सामान का सत्यापन किया जाए।

सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि अब मंदिर समिति के भीतर विवाद लगभग समाप्त हो चुका है, क्योंकि प्रशासन दो कमरे समिति को लौटाने पर सहमत है। ऐसे में मंदिर कार्यालय खोलने और उसकी चाबियां भी समिति को सौंपने पर विचार किया जाए। अदालत के समक्ष यह भी आग्रह रखा गया कि यदि प्रशासन उचित समझे तो मंदिर का पूरा प्रबंधन पुनः समिति को सौंप दिया जाए ताकि पूर्व की तरह मंदिर का संचालन सुचारु रूप से हो सके।

हालांकि, अदालत ने सीधे तौर पर संपूर्ण प्रबंधन समिति को सौंपने का आदेश नहीं दिया, लेकिन प्रशासन को इस पहलू पर विचार करने की बात कही। अंततः न्यायालय ने उपरोक्त टिप्पणियों और निर्देशों के साथ याचिका का निस्तारण कर दिया।

आदेश के हैं व्यापक मायने
यह आदेश केवल दो कमरों की चाबियां सौंपने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इससे यह संकेत भी मिलता है कि अदालत मंदिर प्रबंधन में प्रशासनिक हस्तक्षेप को अस्थायी व्यवस्था के रूप में देख रही है और यदि समिति के भीतर विवाद समाप्त हो चुका हो तो प्रबंधन वापस सौंपने के पक्ष में संतुलित दृष्टिकोण अपना रही है।

साथ ही, अदालत ने इन्वेंटरी सत्यापन पर जोर देकर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि सीलिंग के दौरान रखी गई वस्तुओं की पारदर्शिता बनी रहे और भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button