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उत्तराखंड के आयुष्मान कार्ड पर मेरठ का निवासी हो गया अस्पताल में भर्ती, फर्जीवाड़े पर जांच शुरू

आयुष्मान योजना में बड़े खेल और गिरोह के सक्रिय होने की है आशंका

Amit Bhatt, Dehradun: दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत पहचान से जुड़ी गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति के आयुष्मान कार्ड का इस्तेमाल दूसरे व्यक्ति के उपचार के लिए किया गया। मामले का खुलासा होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को तहरीर सौंपकर जांच की मांग की है।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार गोविंदगढ़ निवासी मंजीत सिंह ने 26 मई को कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती प्रक्रिया के दौरान आयुष्मान काउंटर पर बायोमेट्रिक सत्यापन कराया था। इसके आधार पर आयुष्मान योजना के तहत उपचार की प्रक्रिया शुरू की गई। मामला तब सामने आया जब 29 मई को डिस्चार्ज संबंधी औपचारिकताओं के दौरान आयुष्मान मित्र ने पोस्ट ऑथराइजेशन के लिए मरीज की वार्ड में ली गई तस्वीर उपलब्ध कराने को कहा।

तस्वीर उपलब्ध नहीं होने पर आयुष्मान मित्र स्वयं कार्डियोलॉजी वार्ड पहुंचे। वहां मौजूद नर्सिंग अधिकारी को जब संबंधित मरीज का आधार कार्ड और फोटो दिखाया गया तो उन्होंने बताया कि वार्ड में भर्ती व्यक्ति तस्वीर में दिख रहे व्यक्ति से अलग है। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी।

सीसीटीवी जांच में सामने आई सच्चाई
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक सीसीटीवी फुटेज की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जिस व्यक्ति के नाम पर आयुष्मान कार्ड का उपयोग किया गया, उपचार वह स्वयं नहीं करा रहा था। जांच के दौरान यह भी पता चला कि अस्पताल में भर्ती मरीज कोई अन्य व्यक्ति था।

इसी बीच शनिवार दोपहर मंजीत सिंह अस्पताल पहुंचा और आयुष्मान काउंटर से अपना आधार कार्ड वापस मांगने लगा। अस्पताल कर्मियों को संदेह होने पर उससे पूछताछ की गई। बताया जाता है कि वह वहां से जाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन सुरक्षा कर्मियों की मदद से उसे रोक लिया गया।

पूछताछ में सामने आया दूसरा नाम
अस्पताल प्रशासन का दावा है कि पूछताछ के दौरान मंजीत सिंह ने स्वीकार किया कि उसके आयुष्मान कार्ड का उपयोग मेरठ निवासी विक्की के उपचार के लिए किया जा रहा था। विक्की की उम्र करीब 42 वर्ष बताई गई है और वह उत्तर प्रदेश के मवाना क्षेत्र का रहने वाला है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने भर्ती मरीज का स्वास्थ्य परीक्षण कराया। जांच के बाद उसे आवश्यक चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया।

एफआईआर की जानकारी मिलने पर बिगड़ी तबीयत
अस्पताल अधिकारियों के अनुसार जब संबंधित व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज होने की संभावना की जानकारी मिली तो उसने सीने में दर्द की शिकायत की। बाद में उसे उपचार के लिए आपातकालीन विभाग भेजा गया। इस दौरान पुलिस कर्मी भी मौके पर मौजूद रहे।

योजना की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
आयुष्मान भारत योजना आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद मरीजों को निशुल्क उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। ऐसे में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किसी और के कार्ड का इस्तेमाल कर उपचार प्राप्त करने का मामला सामने आने से योजना की सत्यापन प्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

अस्पताल प्रशासन ने पूरे प्रकरण की जांच कर दोषियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की है। अब पुलिस जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला केवल व्यक्तिगत स्तर की धोखाधड़ी का है या इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका है।

जांच के केंद्र में ये सवाल
– बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद पहचान में गड़बड़ी कैसे हुई?
– भर्ती मरीज और कार्डधारक के बीच अंतर समय रहते क्यों नहीं पकड़ा गया?
– क्या इस तरह के अन्य मामले भी सामने आ सकते हैं?
– आयुष्मान योजना में पहचान सत्यापन की मौजूदा व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

घटनाक्रम एक नजर में
– 26 मई : आयुष्मान कार्ड के आधार पर बायोमेट्रिक सत्यापन।
– 29 मई : डिस्चार्ज प्रक्रिया के दौरान मरीज की फोटो मांगी गई।
– वार्ड में मौजूद मरीज और आधार कार्ड की तस्वीर में अंतर मिला।
– सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की गई।
– जांच में सामने आया कि उपचार कोई दूसरा व्यक्ति करा रहा था।
– पूछताछ में आयुष्मान कार्ड के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी मिली।

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