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अस्पताल के डॉक्टर कई दिन से गायब, नर्सों के भरोसे हैं भर्ती किए मरीज

एसएचए की छापेमारी में खुला आयुष्मान योजना के नाम पर चल रहा उपचार का खेल, सामान्य मरीज भी आईसीयू में मिले

Rajkumar Dhiman, Dehradun: गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार देने के लिए शुरू की गई आयुष्मान योजना की आड़ में कुछ निजी अस्पताल किस तरह मनमानी कर रहे हैं। इसका चौंकाने वाला खुलासा राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएचए) की छापेमार कार्रवाई में हुआ है। निरीक्षण के दौरान कहीं मरीजों से अवैध वसूली मिली, तो कहीं सामान्य बीमारी वाले मरीजों को आईसीयू में भर्ती कर बिल बढ़ाया जा रहा था। इसके अलावा कहीं पूरा अस्पताल डॉक्टरों के बिना ही संचालित होता मिला।

अस्पतालों पर छापेमारी के दौरान एसएचए की टीम।

राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अध्यक्ष अरविंद सिंह ह्यांकी के निर्देश पर निदेशक क्लेम डॉ. सरोज नैथानी के नेतृत्व में गठित टीम ने पावरलाइफ, प्रेमसुख, प्रकाशदीप, वेलमेड और सुनंदा मेडिकल सेंटर का औचक निरीक्षण किया। जांच में सामने आई गंभीर अनियमितताओं के बाद पावरलाइफ अस्पताल, प्रकाशदीप अस्पताल और सुनंदा मेडिकल सेंटर की डायलिसिस यूनिट की संबद्धता निलंबित करने की संस्तुति की गई है, जबकि प्रेमसुख और सुनंदा अस्पताल पर आर्थिक दंड लगाने की सिफारिश की गई है। सभी संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।

प्रकाशदीप अस्पताल में डॉक्टर गायब, मरीज नर्सों के भरोसे
निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर हालात प्रकाशदीप अस्पताल में मिले। यहां मरीजों से 85 हजार रुपये तक वसूलने की शिकायत सामने आई। अस्पताल का आईसीयू बदहाल स्थिति में मिला और दो गंभीर मरीजों को तत्काल दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़ा। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि निरीक्षण के समय अस्पताल में एक भी उपचाररत डॉक्टर मौजूद नहीं था। मरीजों और तीमारदारों ने बताया कि कई दिनों से नियमित चिकित्सकीय सेवाएं नहीं मिल रही हैं और पूरा इलाज नर्सिंग स्टाफ के भरोसे चल रहा है।

पावरलाइफ में बीमारी छोटी, इलाज ICU वाला
पावरलाइफ अस्पताल में निरीक्षण टीम को सामान्य वार्ड तक नहीं मिला। अस्पताल में केवल एचडीयू और आईसीयू संचालित होते पाए गए। जांच के दौरान एक ऐसे मरीज को आईसीयू में भर्ती रखा गया था जिसे केवल घबराहट और उल्टी की शिकायत थी। टीम को संदेह हुआ कि मरीज को बिना चिकित्सकीय आवश्यकता के आईसीयू में रखकर उपचार का खर्च बढ़ाया जा रहा था। अस्पताल में सूचना बोर्ड, टोल फ्री नंबर और मरीज जागरूकता सामग्री भी नदारद मिली। बायोमेडिकल वेस्ट के रिकॉर्ड महीनों से अपडेट नहीं किए गए थे।

प्रेमसुख अस्पताल में आयुष्मान मरीज से भी वसूले रुपये
प्रेमसुख अस्पताल में आयुष्मान लाभार्थी से हजारों रुपये लिए जाने की शिकायत सही पाई गई। जांच में सामने आया कि मरीज से इलाज के नाम पर 48 हजार रुपये और अन्य मदों में अतिरिक्त राशि ली गई। अस्पताल में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था कमजोर मिली, रैंप नहीं था और योजना से जुड़ी अनिवार्य सूचनाएं भी प्रदर्शित नहीं थीं। स्थिति इतनी लचर थी कि ऑपरेशन थिएटर की जिम्मेदारी प्रशिक्षित नर्स के बजाय तकनीकी कर्मचारी संभालता मिला।

सुनंदा मेडिकल सेंटर की डायलिसिस यूनिट पर बड़ा सवाल
सुनंदा मेडिकल सेंटर की डायलिसिस यूनिट में स्वास्थ्य मानकों की खुली अनदेखी मिली। न तो पर्याप्त वेंटिलेशन था, न आपातकालीन निकास और न ही मरीजों के महत्वपूर्ण स्वास्थ्य रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से उपलब्ध थे। डायलिसिस के लिए इस्तेमाल होने वाला आरओ सिस्टम भी निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरा। तीमारदारों के बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं मिली।

वेलमेड में भी व्यवस्था पर उठे सवाल
वेलमेड अस्पताल में भी कई कमियां सामने आईं। बड़े अस्पताल होने के बावजूद योजना से जुड़े मरीजों की संख्या बेहद कम मिली। रैंप, जागरूकता सामग्री और कई जरूरी रिकॉर्ड अधूरे पाए गए। बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन और ऑपरेशन थिएटर की गुणवत्ता जांच से जुड़े दस्तावेज भी संतोषजनक नहीं मिले।

निजी अस्पतालों में हड़कंप, होगी सख्त कार्रवाई
एसएचए की इस कार्रवाई ने आयुष्मान योजना से जुड़े निजी अस्पतालों में हड़कंप मचा दिया है। जांच ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जिन संस्थानों को गरीब मरीजों के उपचार की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वहां आखिर मरीजों की सुरक्षा, पारदर्शिता और उपचार की गुणवत्ता के साथ इतना बड़ा समझौता कैसे हो रहा था। अब निगाहें कारण बताओ नोटिस के जवाब और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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