चमोली पुलिस की हिरासत में है प्रमोद नौटियाल, मंदिर समिति के चार अन्य कर्मी भी उठाए गए
बदरीनाथ में एसआईटी कर रही सभी से पूछताछ, परिवार ने जताई थी सुरक्षा को लेकर आशंका

Rajkumar Dhiman, Dehradun: बदरीनाथ धाम के चर्चित चढ़ावा चोरी प्रकरण में रविवार देर रात सामने आए घटनाक्रम पर अब बड़ा अपडेट सामने आया है। बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के निलंबित वैयक्तिक सहायक (पीए) प्रमोद नौटियाल किसी अज्ञात पुलिस कर्मियों के कब्जे में नहीं, बल्कि चमोली पुलिस की एसआईटी की हिरासत में हैं। एसआईटी उन्हें रविवार रात देहरादून स्थित उनके नेहरू कॉलोनी आवास से पूछताछ के लिए अपने साथ बदरीनाथ ले गई, जहां उनसे मामले में गहन पूछताछ की जा रही है।
चमोली के एसपी सुरजीत सिंह पंवार के अनुसार, एसआईटी ने प्रमोद नौटियाल के साथ ही मंदिर समिति के चार अन्य कर्मचारियों को भी पूछताछ के लिए बुलाया है। इनमें सीसीटीवी निगरानी से जुड़े कर्मचारी, एक अधिकारी, सहायक लेखाकार तथा अन्य संबंधित कर्मचारी शामिल हैं। सभी से बदरीनाथ थाने में अलग-अलग बिंदुओं पर पूछताछ की जा रही है।
परिवार ने जताई थी अपहरण की आशंका
रविवार रात प्रमोद नौटियाल के घर चार सादे कपड़ों में पहुंचे लोग स्वयं को पुलिसकर्मी बताते हुए उन्हें बयान दर्ज कराने के नाम पर अपने साथ ले गए थे। देर रात तक उनके वापस नहीं लौटने और स्थानीय पुलिस के पास जानकारी नहीं होने पर उनकी मां हेमलता नौटियाल ने नेहरू कॉलोनी पुलिस को तहरीर देकर अपहरण और अनहोनी की आशंका जताई थी।
परिवार का कहना था कि प्रमोद नौटियाल ने चढ़ावा चोरी मामले में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और उन्हें 16 जुलाई तक गिरफ्तारी जैसी कठोर कार्रवाई से राहत मिली हुई थी। इसी कारण रात में उन्हें घर से ले जाए जाने पर परिजनों की चिंता बढ़ गई थी। हालांकि अब स्पष्ट हो गया है कि उन्हें चमोली पुलिस की एसआईटी पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई थी।
चार अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ
जांच का दायरा अब केवल प्रमोद नौटियाल तक सीमित नहीं है। एसआईटी ने मंदिर समिति के चार अन्य कर्मचारियों को भी पूछताछ के लिए बुलाया है। सूत्रों के अनुसार, इनमें सीसीटीवी सिस्टम की निगरानी करने वाले कर्मचारी, एक अधिकारी, सहायक लेखाकार सहित अन्य संबंधित कार्मिक शामिल हैं। जांच टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि चढ़ावे की गिनती, रिकॉर्ड संधारण, सीसीटीवी निगरानी और नकदी प्रबंधन की प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका थी।
32 दिन की सीसीटीवी फुटेज गायब होने पर जांच तेज
चढ़ावा चोरी मामले में सबसे बड़ा सवाल सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को लेकर खड़ा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, संवेदनशील क्षेत्रों की कम से कम 45 दिन की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जानी चाहिए थी, लेकिन जांच टीम को केवल 15 दिन की फुटेज ही उपलब्ध हुई। करीब 32 दिन की रिकॉर्डिंग उपलब्ध न होने से जांच एजेंसियां इसकी भी पड़ताल कर रही हैं।
जांचकर्ताओं का मानना है कि गायब रिकॉर्डिंग से यह स्पष्ट हो सकता था कि चढ़ावा कक्ष में किन-किन लोगों की आवाजाही हुई, चढ़ावे के प्रबंधन में किसकी क्या भूमिका रही और कथित अनियमितताओं का दायरा कितना व्यापक था। इसी कारण अब सीसीटीवी सिस्टम से जुड़े कर्मचारियों से भी विस्तार से पूछताछ की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोप सामने आने के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति ने प्रमोद नौटियाल को निलंबित कर दिया था। इसके बाद समिति की ओर से पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया गया और मामले की जांच एसआईटी को सौंपी गई।
जांच में सामने आया कि कथित गड़बड़ियां केवल एक दिन तक सीमित नहीं थीं, बल्कि कई दिनों तक चढ़ावे की राशि और अन्य सामग्री के प्रबंधन में अनियमितताओं की आशंका है। इसी क्रम में अब एसआईटी रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, कर्मचारियों की भूमिका और पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली की जांच कर रही है।
अब जांच के केंद्र में ये सवाल
-32 दिन की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग आखिर कहां गई?
-क्या रिकॉर्डिंग तकनीकी कारणों से नष्ट हुई या जानबूझकर हटाई गई?
-चढ़ावा प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया में किन-किन कर्मचारियों की क्या भूमिका थी?
-क्या कथित अनियमितताओं में एक से अधिक लोगों की संलिप्तता है?
-एसआईटी की पूछताछ से क्या नए तथ्य सामने आते हैं?
चढ़ावा चोरी प्रकरण में एसआईटी द्वारा प्रमोद नौटियाल और मंदिर समिति के अन्य कर्मचारियों से एक साथ पूछताछ किए जाने से साफ है कि जांच अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुकी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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