निजी दोपहिया से डिलीवरी करने वाले युवाओं पर कार्रवाई के विरोध में उतरी क्रांति सेना, ‘राइडर सेना’ बनाने का ऐलान
बढ़ती बेरोजगारी के दौरान में दोपहिया वाहनों को सीज करना बताया उत्पीड़न

Round The Watch News: जोमाटो (Zomato), स्विगी (Swiggy), जेप्टो (Zepto), जियोमार्ट (JioMart), बिगबास्केट (BigBasket) और फ्लिप्कार्ट (Fipkart) समेत विभिन्न प्लेटफॉर्म पर निजी बाइक या स्कूटी से डिलीवरी कर परिवार चलाने वाले युवाओं के खिलाफ कार्रवाई का उत्तराखंड क्रांति सेना (उक्रांस) ने कड़ा विरोध किया है। पार्टी ने साफ कहा है कि नियमों की आड़ में मेहनत कर रोजी-रोटी कमाने वाले युवाओं का रोजगार छीनना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उक्रांस के प्रदेश अध्यक्ष ललित श्रीवास्तव उत्तराखंडी ने कहा कि बेरोजगारी के दौर में बड़ी संख्या में युवा डिलीवरी राइडर के रूप में काम कर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं। ऐसे में उनकी बाइक या स्कूटी सीज करने और कमाई रोकने की कार्रवाई से सीधे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा होता है।
उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा व्यवस्था में नियमों से संबंधित कोई कमी है तो सरकार को उसमें सुधार करना चाहिए। डिलीवरी राइडर्स और यात्री परिवहन सेवाओं के लिए अलग और स्पष्ट नियम बनाए जाने की जरूरत है। उक्रांस ने मांग की कि अनावश्यक कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए और राइडर्स को नियमों के अनुरूप आने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। साथ ही डिलीवरी प्लेटफॉर्म कंपनियों की जवाबदेही भी तय की जाए।
‘उत्तराखंड राइडर सेना’ बनाने का ऐलान
ललित श्रीवास्तव उत्तराखंडी ने उत्तराखंड क्रांति सेना के अंतर्गत ‘उत्तराखंड राइडर सेना’ के गठन की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि यह संगठन प्रदेश के डिलीवरी राइडर्स और गिग वर्कर्स के रोजगार, सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की आवाज बनेगा। उन्होंने प्रदेशभर के राइडर्स से अधिक से अधिक संख्या में इससे जुड़ने की अपील की।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन कानून के खिलाफ नहीं है, लेकिन कानून की आड़ में मेहनतकश युवाओं का रोजगार छीनना स्वीकार नहीं किया जाएगा। उक्रांस ने सरकार और परिवहन विभाग से इस मामले में जल्द उचित निर्णय लेने की मांग की है। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो वह आंदोलन करने को बाध्य होगी, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। उक्रांस ने अपना संदेश स्पष्ट शब्दों में दिया कि “रोजगार पर शिकंजा नहीं, व्यवस्था में सुधार चाहिए। राइडर्स को प्रताड़ना नहीं, संरक्षण चाहिए।”



