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ब्रेकिंग: सरकारी दफ्तरों में अब कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, प्रवेश से लेकर आचरण तक सख्त एसओपी लागू

प्रारंभिक शिक्षा निदेशक पर रायपुर विधायक और उनके समर्थकों की ओर से मारपीट के मामले के बाद शासन ने उठाया कदम, सीएम ने दिए थे निर्देश

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड सरकार ने पूरे राज्य के शासकीय कार्यालयों में अधिकारियों व कर्मचारियों की सुरक्षा को सुदृढ़ करने और अप्रिय/हिंसक घटनाओं की रोकथाम के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू कर दी है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की ओर से जारी आदेश सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भेजा गया है। इसके साथ ही SOP का विस्तृत दस्तावेज भी जारी किया गया है।
सरकार ने यह कदम उन घटनाओं को देखते हुए उठाया है जिनमें विभिन्न कार्यालयों में कर्मचारियों से बदसलूकी, दबाव, अव्यवस्था और हिंसक व्यवहार सामने आए थे। खासकर यह कदम प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल के साथ हाल में की गई मारपीट के बाद त्वरित रूप से उठाए गए।

SOP का उद्देश्य और दायरा
नई SOP का मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को बाहरी आक्रामकता, अनावश्यक दबाव और हिंसा से सुरक्षा प्रदान करना, कार्यालयों में सुरक्षित, नियंत्रित और कानूनसम्मत तंत्र स्थापित करना और सभी आगंतुकों—जनप्रतिनिधि, ठेकेदार, निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO), समर्थक, आमजन—पर एक समान सुरक्षा नियम लागू करना है। यह SOP पूरे राज्य के सरकारी कार्यस्थलों—निदेशालय, जिलाधिकारी परिसर, खंड विकास कार्यालय, शैक्षणिक व चिकित्सा संस्थान—पर लागू होगी। हालांकि, सचिवालय और विधानसभा जैसे पहले से उच्च सुरक्षा वाले परिसरों पर यह लागू नहीं है। विभागों को सुरक्षा खतरे के आधार पर PSARA के तहत पंजीकृत सुरक्षा एजेंसियों से सुरक्षा कर्मी तैनात करने का अधिकार दिया गया है।

परिधि सुरक्षा और प्रवेश नियंत्रण—कड़े प्रावधान
1. अनिवार्य पहचान
सभी स्थायी व संविदा कर्मचारियों को टैम्पर प्रूफ पहचान पत्र दृष्टिगोचर रूप से धारण करना अनिवार्य किया गया है।
2. वाहन प्रवेश पर नियंत्रण
आम जनता के वाहनों का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
VIP और दिव्यांगजन के वाहन कड़े अंडर-व्हीकल मिरर से जांच के बाद ही प्रवेश पा सकेंगे।
3. Screening प्रक्रिया
प्रवेश द्वारों पर DFMD स्कैनर अनिवार्य।
सभी व्यक्तियों की फ्रिस्किंग की जाएगी।

पूर्व में दुर्व्यहार कर चुके व्यक्तियों की एंट्री बंद
जिन व्यक्तियों का पूर्व में दुर्व्यवहार मिला है, उनके लिए “नो-एंट्री फोटो पंजिका” रखी जाएगी और प्रवेश वर्जित रहेगा।
विशिष्ट व्यक्तियों के वाहन केवल पूर्व अनुमति से ही परिसर में प्रवेश कर पायेंगे।

Visitor Management System (VMS) अनिवार्य
जहां संभव हो वहां डिजिटल VMS, अन्यथा भौतिक रजिस्टर के माध्यम से आगंतुक विवरण दर्ज किया जाएगा।
VMS में शामिल होगा आगंतुक की उच्च रिजॉल्यूशन फोटो, वैध सरकारी पहचान पत्र का सत्यापन, नाम, पता, मोबाइल नंबर, पहचान संख्या और आगमन का उद्देश्य। सत्यापन के बाद QR/RFID आधारित टाइम-स्टैम्प्ड पास जारी होगा, जो आगंतुक को केवल निर्धारित मीटिंग जोन तक सीमित रखेगा। डिजिटल पास न होने पर हस्ताक्षरित पेपर-पास जारी किया जाएगा, जिस पर प्रवेश-निकास का समय व मान्यता क्षेत्र उल्लेखित होगा।

वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात के लिए अनिवार्य अपॉइंटमेंट
बिना पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम आने वाले आगंतुकों को प्रवेश से ही वापस कर दिया जाएगा।

आगंतुकों के लिए Do’s and Don’ts—कठोर आचार संहिता लागू
Do’s (क्या करें)
प्रवेश से पूर्व रिसेप्शन पर पंजीकरण
वैध पहचान पत्र दिखाना
निर्धारित अपॉइंटमेंट या टोकन की प्रतीक्षा
शिष्ट भाषा का प्रयोग

Don’ts (क्या न करें)
शोर-शराबा, नारेबाजी, गाली-गलौज
किसी अधिकारी पर धक्का-मुक्की या हमला
बिना अनुमति वीडियो रिकॉर्डिंग
ज्वलनशील पदार्थ, हथियार, लाठी-डंडा या अन्य आपत्तिजनक वस्तु लेकर आना
लोक सेवक पर अभद्र व्यवहार या हमला BNS की सुसंगत धाराओं के तहत तुरंत FIR का आधार होगा, और दोषी को तत्काल परिसर से बाहर किया जाएगा।
कार्यालय पूर्णतः CCTV निगरानी में रहेगा, और अमर्यादित व्यवहार से व्यक्ति कानूनी कार्रवाई का भागीदार बन सकता है।

जनसामान्य से भेंट एवं बैठक—नए प्रोटोकॉल
विभागाध्यक्ष जन-शिकायतों के लिए नियत समय तय कर उसे वेबसाइट व प्रवेश द्वार पर प्रदर्शित करेंगे।
प्रतिनिधिमंडल में अधिकतम 2 लोग ही अधिकारी के कक्ष में जा सकेंगे।
– उससे अधिक संख्या होने पर बैठक कॉन्फ्रेंस रूम में होगी।
– कॉन्फ्रेंस रूम में CCTV और एक अतिरिक्त निकास द्वार अनिवार्य है।
निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ अधिकतम 3 लोग ही अधिकारी कक्ष में प्रवेश कर सकेंगे।
VIP के साथ आने वाले सशस्त्र सुरक्षा कर्मियों को अपने शस्त्र रिसेप्शन पर घोषित करना होगा, और वे निर्दिष्ट प्रतीक्षालय में ही रहेंगे।
प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख और सदस्यों का दायित्व होगा कि कार्यालय में मर्यादा और शिष्टाचार बनाए रखें।

उन्नत सुरक्षा अवसंरचना—CCTV व साइलेंट पैनिक अलार्म अनिवार्य
1. CCTV
प्रवेश द्वारों, गलियारों और वरिष्ठ अधिकारियों के कक्षों में HD गुणवत्ता वाले CCTV कैमरे (ऑडियो रिकॉर्डिंग सहित) लगाए जाएंगे।
सभी वीडियो फुटेज का स्थानीय सर्वर पर न्यूनतम 90 दिन बैकअप अनिवार्य है।
2. साइलेंट पैनिक अलार्म
वरिष्ठ अधिकारियों की डेस्क के नीचे और रिसेप्शन पर गुप्त “साइलेंट पैनिक अलार्म” लगाए जाएंगे।
आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा को बिना शोर संकेत जाएगा।

घटना के बाद की विधिक व संस्थागत कार्यवाही
घटनास्थल को तुरंत सील कर “चेन ऑफ कस्टडी” सुनिश्चित की जाएगी।
सफाई कर्मचारियों को साक्ष्यों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करने के निर्देश।
CCTV फुटेज की सुरक्षित कॉपी तुरंत जाँच अधिकारी को उपलब्ध कराई जाएगी।
घायल कर्मचारियों का तत्काल उपचार कर मेडिको-लीगल केस दर्ज किया जाएगा।
FIR में BNS 2023 और अन्य अधिनियमों की उपयुक्त धाराएँ अनिवार्य रूप से शामिल होंगी।
विवेचना केवल निरीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा की जाएगी।
जांच दो माह के भीतर पूरी की जाएगी।

प्रदर्शन अनिवार्य—कार्यालय परिसर में SOP के अंश चस्पा किए जाएं
कार्यालयों के प्रमुख स्थानों पर निम्न को प्रदर्शित करना अनिवार्य है—
आगंतुकों हेतु आचार संहिता
दंडनीय कृत्यों की सूची
महत्वपूर्ण संपर्क विवरण
वार्षिक सुरक्षा ऑडिट भी होगा
महत्वपूर्ण या उच्च-जोखिम वाले निदेशालयों और कार्यालयों में, संबंधित विभागीय सचिव के अनुरोध पर
गृह विभाग वार्षिक सुरक्षा ऑडिट करवाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पुलिस मुख्यालय को दी जाएगी।
सरकार का स्पष्ट संकेत—शासनिक कार्यालयों में अब सुरक्षा और अनुशासन सर्वोच्च
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने विभागों को निर्देशित किया है कि नए SOP को पूरी कड़ाई से लागू किया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही न होने पाए।

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