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वीडियो: भालू को गोली मारने का आदेश, वन दरोगा और ग्राम प्रधान समेत 03 को कर दिया गंभीर घायल

बिना सुरक्षा भालू की मूवमेंट देखने ग्रामीणों संग पहुंच गई थी वन विभाग की टीम, डीएफओ पर फूटा गुस्सा

Rajkumar Dhiman, Dehradun: टिहरी में खूंखार भालू को गोली मारने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। लेकिन, यह साहस भी सरकारी मशीनरी तब उठा पाई, जब भालू ने वन दरोगा और ग्राम प्रधान समेत 03 को गंभीर घायल कर दिया। दरअसल, टिहरी जिले के सुल्याधार जंगल क्षेत्र में भालू की बढ़ती गतिविधियों के बीच उसे ट्रैक करने एक टीम रवाना हुई थी। जिसमें ग्रामीण भी थे और तभी भालू ने हमला कर दिया। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया और मामला जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंच गया, जहां करीब चार घंटे तक विरोध प्रदर्शन चला। जिसके बाद भालू को शूट करने के आदेश किए गए।

 

बिना सुरक्षा जंगल पहुंची थी टीम, अचानक हुआ हमला
मिली जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 12 बजे वन विभाग को सुल्याधार क्षेत्र में भालू की मूवमेंट की सूचना मिली थी। इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची।

बैरगणी गांव के ग्राम प्रधान युद्धवीर सिंह रावत और वन दरोगा अजय पाल पंवार के नेतृत्व में ग्रामीणों का एक समूह भी जंगल की ओर रवाना हुआ। टीम का उद्देश्य केवल भालू की लोकेशन की सटीक जानकारी जुटाना था, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके। हालांकि, पूरी टीम बिना किसी हथियार या सुरक्षा उपकरण के ही जंगल में चली गई।

 

घात लगाकर बैठे भालू ने किया हमला
जंगल में प्रवेश करते ही हालात अचानक बिगड़ गए। टीम अभी भालू को तलाश ही रही थी कि पहले से घात लगाए बैठे भालू ने अचानक हमला कर दिया।

हमले में ग्राम प्रधान युद्धवीर सिंह रावत, वन दरोगा अजय पाल पंवार और एक अन्य ग्रामीण विनोद रावत घायल हो गए। तीनों के शरीर पर भालू के नाखूनों से गहरे जख्म आए। मौके पर मौजूद अन्य ग्रामीणों ने शोर मचाकर और पत्थर फेंककर किसी तरह भालू को भगाया, जिससे तीनों की जान बच सकी।

कंधों और कंडी के सहारे घायलों को निकाला
हमले के बाद जंगल में अफरा-तफरी मच गई। घायल चलने की स्थिति में नहीं थे, ऐसे में ग्रामीणों ने उन्हें कंडी और कंधों के सहारे जंगल से बाहर निकाला। काफी मशक्कत के बाद उन्हें सड़क तक लाया गया, जहां से वाहन के जरिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया। फिलहाल तीनों का इलाज जारी है।

DM ऑफिस पहुंचे ग्रामीण, घायल भी धरने पर बैठा
घटना से नाराज ग्रामीण घायलों को साथ लेकर सीधे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच गए और विरोध शुरू कर दिया। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब एक घायल व्यक्ति खुद ही धरने पर बैठ गया। ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की।

DFO पर लापरवाही के आरोप, बढ़ा आक्रोश
ग्रामीणों ने डीएफओ पुनीत तोमर पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि टीम को बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के जंगल में भेजा गया, जो बेहद लापरवाही भरा कदम है।ग्रामीणों ने यह भी कहा कि क्षेत्र में लगातार भालू की गतिविधियां बढ़ रही हैं, लेकिन वन विभाग इसे गंभीरता से नहीं ले रहा।

4 घंटे बाद ‘शूट’ के आदेश, तब शांत हुआ मामला
करीब चार घंटे तक चले विरोध के बाद प्रशासन हरकत में आया। जिलाधिकारी ने भालू को शूट करने के आदेश जारी किए। जैसे ही यह आदेश सामने आया, ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने धरना समाप्त कर दिया।

पहले भी हो चुका है हमला, दहशत में लोग
ग्रामीणों के अनुसार, यह पहली घटना नहीं है। करीब एक सप्ताह पहले 21 मार्च को भी इसी क्षेत्र में एक महिला पर भालू ने हमला किया था, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी। उस महिला का इलाज फिलहाल ऋषिकेश स्थित एम्स में चल रहा है। लगातार हो रही घटनाओं के चलते क्षेत्र में दहशत का माहौल है और लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

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