Uttarakhand

मियावाकी घोटाले पर खुलासा: मंत्री सुबोध उनियाल ने दिए थे आदेश, वन विभाग बोला– “रिकॉर्ड ही नहीं”

RTI में चौंकाने वाला जवाब, करोड़ों की योजना की जांच पर उठे गंभीर सवाल

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड वन विभाग में चर्चित मियावाकी प्लांटेशन मामले को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जिस कथित घोटाले की जांच के आदेश खुद वन मंत्री सुबोध उनियाल ने सार्वजनिक रूप से दिए थे, उसी मामले में अब वन विभाग ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जवाब देते हुए कहा है कि विभागीय अभिलेखों में ऐसी कोई सूचना उपलब्ध नहीं है।

वन विभाग के इस जवाब ने न सिर्फ जांच प्रक्रिया बल्कि सरकारी जवाबदेही और पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच अब यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर जांच वास्तव में हुई थी या केवल बयानबाजी तक सीमित रही।

RTI एक्टिविस्ट ने मांगी थी जांच से जुड़ी पूरी फाइल

हल्द्वानी निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट रजत जोशी ने 11 मार्च 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत वन विभाग में आवेदन दाखिल किया था।

उन्होंने विभाग से जून 2025 में वन मंत्री के आदेश पर भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी कपिल लाल को सौंपी गई जांच से संबंधित—

कार्यालय आदेश की प्रमाणित प्रति, फाइल नोटिंग, विभागीय पत्राचार, जांच रिपोर्ट, दोषी अधिकारियों पर हुई कार्रवाई जैसे सभी दस्तावेज मांगे थे।

लेकिन 30 अप्रैल 2026 को लोक सूचना अधिकारी एवं अपर सांख्यिकीय अधिकारी सुरेश चौहान की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया कि संबंधित शाखाओं से प्राप्त सूचना के अनुसार “वांछित सूचना विभागीय अभिलेखों में संधारित नहीं है।”

यानी जिस जांच का सार्वजनिक स्तर पर ऐलान हुआ, जिसकी खबरें मीडिया में प्रमुखता से प्रकाशित हुईं और जिसमें करोड़ों रुपये के बजट पर सवाल उठे, उसका कोई रिकॉर्ड विभाग के पास मौजूद नहीं बताया गया।

आखिर जांच हुई थी या सिर्फ घोषणा?

दरअसल जून 2025 में देहरादून और मसूरी वन प्रभागों में मियावाकी तकनीक से पौधरोपण के लिए प्रस्तावित करोड़ों रुपये के बजट को लेकर विवाद सामने आया था। मामले में आरोप लगे थे कि पौधरोपण की वास्तविक लागत की तुलना में कई गुना अधिक बजट प्रस्तावित किया गया। विवाद बढ़ने पर वन मंत्री सुबोध उनियाल ने जांच के आदेश दिए थे। उस समय तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक डॉ. धनंजय मोहन ने भी जांच कराए जाने की बात कही थी।

अब RTI में रिकॉर्ड न मिलने से कई सवाल उठ रहे हैं—क्या जांच के आदेश औपचारिक रूप से जारी ही नहीं हुए? यदि जांच हुई, तो उसका रिकॉर्ड कहां गया? क्या विभागीय स्तर पर फाइलें दबा दी गईं? करोड़ों की योजना में जवाबदेही तय क्यों नहीं हुई?

करोड़ों के बजट पर लगे थे भ्रष्टाचार के आरोप

मियावाकी तकनीक को कम समय में घना जंगल विकसित करने की जापानी पद्धति माना जाता है। उत्तराखंड में इसी तकनीक के जरिए बड़े स्तर पर पौधरोपण की योजना बनाई गई थी। लेकिन, आरोप लगे कि योजना के नाम पर जरूरत से कई गुना अधिक बजट प्रस्तावित किया गया। मामला सार्वजनिक होने के बाद योजनाओं को रोकने और बजट सरेंडर करने की बात भी सामने आई थी।

अब विभाग के “रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं” वाले जवाब ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा इस प्रकरण में उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज होने की संभावना है।

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