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दो साल तक सूचना दबाई, एसडीएम पर 10 हजार का जुर्माना और डीएम को भी फटकार

RTI मामले में उत्तराखंड सूचना आयोग की बड़ी कार्रवाई, बार-बार आदेश के बावजूद नहीं दी गई पूरी सूचना

Rajkumar Dhiman, Dehradun: सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी को करीब दो साल तक टालने और आयोग के आदेशों की लगातार अवहेलना करने पर उत्तराखंड सूचना आयोग ने हरिद्वार प्रशासन पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं वर्तमान में भगवानपुर के उप जिलाधिकारी देवेंद्र सिंह नेगी पर 10 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया है, जबकि जिलाधिकारी हरिद्वार को भी चेतावनी भरे निर्देश जारी किए गए हैं।

राज्य सूचना आयुक्त दिलीप सिंह कुंवर द्वारा 8 मई 2026 को पारित आदेश में साफ कहा गया कि सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के प्रावधानों की लगातार अनदेखी की गई और अपीलकर्ता को पूर्ण सूचना उपलब्ध कराने में प्रशासन विफल रहा।

क्या है पूरा मामला
प्रयागराज निवासी अपीलकर्ता हरीशंकर पाण्डेय ने 21 मार्च 2024 को रुड़की एसडीएम कार्यालय में तीन बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। आवेदन 27 मार्च 2024 को कार्यालय में प्राप्त हुआ, लेकिन निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक सूचना नहीं दी गई। इसके बाद मामला प्रथम अपील और फिर द्वितीय अपील के रूप में उत्तराखंड सूचना आयोग पहुंचा।

आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक विभागीय अपीलीय अधिकारी ने 25 जुलाई 2024 को आदेश देते हुए बिंदु संख्या-1 की सूचना पृष्ठ संख्या अंकित कर प्रमाणित रूप में देने और बिंदु 2 व 3 की सूचनाएं उपलब्ध कराने को कहा था, लेकिन आदेश का पालन नहीं हुआ।

आयोग ने माना-अधूरी और अप्रमाणित सूचना दी गई
मामले की सुनवाई 9 जून 2025, 13 अगस्त 2025, 12 नवंबर 2025 और 11 फरवरी 2026 को लगातार हुई। हर सुनवाई में आयोग ने पाया कि या तो सूचना अधूरी दी गई या फिर बिना प्रमाणीकरण के दस्तावेज भेजे गए। कई बार आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सूचना क्रमवार, सत्यापित और निशुल्क उपलब्ध कराई जाए, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही जारी रही।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बिंदु संख्या-2 से जुड़ी पूरी सूचना लगभग दो वर्ष बाद भी उपलब्ध नहीं कराई गई, जो सूचना का अधिकार अधिनियम का सीधा उल्लंघन है।

तत्कालीन PIO पर 10 हजार का जुर्माना
राज्य सूचना आयोग ने तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं उप जिलाधिकारी रुड़की रहे देवेंद्र सिंह नेगी, जो वर्तमान में भगवानपुर में तैनात हैं, को कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद दोषी मानते हुए उन पर सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) के तहत 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। आयोग ने आदेश दिया कि यह राशि तीन सप्ताह के भीतर राजकोष में जमा कराई जाए, अन्यथा वेतन से वसूली की कार्रवाई की जाएगी।

आयोग ने अपने आदेश में बॉम्बे हाईकोर्ट और कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसलों का भी उल्लेख किया, जिनमें सूचना देने में लापरवाही को गंभीर प्रशासनिक चूक माना गया है।

जिलाधिकारी हरिद्वार को भी आयोग की फटकार, देना होगा हर्जाना
आयोग ने यह भी कहा कि 11 फरवरी 2026 की सुनवाई में जिलाधिकारी हरिद्वार से पूछा गया था कि अपीलकर्ता को हुई आर्थिक और मानसिक क्षति के लिए मुआवजा क्यों न दिया जाए, लेकिन लगभग डेढ़ महीने बाद भी कोई स्पष्ट जवाब आयोग को नहीं भेजा गया। इसे आयोग ने गंभीर लापरवाही माना।

इसके बाद आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 19(8)(ब) के तहत अपीलकर्ता को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए 05 हजार रुपये प्रतिकर देने का आदेश दिया। यह राशि राजस्व विभाग हरिद्वार द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी।

आयोग की टिप्पणी ने बढ़ाई प्रशासन की मुश्किल
आयोग ने अपने आदेश में साफ शब्दों में कहा कि लगातार चार सुनवाईयों के बावजूद सूचना उपलब्ध न कराया जाना राजस्व विभाग की शिथिलता और सूचना अधिकार कानून के प्रति गंभीर उदासीनता को दर्शाता है। आयोग ने पूरे प्रकरण को प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला माना।

आदेश के मुख्य बिंदु
-RTI आवेदन 21 मार्च 2024 को दिया गया
-दो साल तक पूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई
-कई बार आयोग और विभागीय अपीलीय अधिकारी के आदेशों की अनदेखी
-तत्कालीन PIO देवेंद्र सिंह नेगी पर 10 हजार रुपये जुर्माना
-अपीलकर्ता को 5 हजार रुपये प्रतिकर देने के आदेश
-जिलाधिकारी हरिद्वार को जवाबदेही तय करने के निर्देश
-सूचना आयोग ने प्रशासनिक लापरवाही पर जताई सख्त नाराजगी

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