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विवादित मस्जिद को सील किया गया, भारी पुलिस बल रहा मौजूद

आवासीय भवन में चल रही थी मस्जिद, एमडीडीए ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद की कार्रवाई

Rajkumar Dhiman, Dehradun: देहरादून जिले के डोईवाला क्षेत्र स्थित थानों में सोमवार को मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने एक मस्जिद परिसर को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। परिसर सील होने के बाद स्थानीय निवासियों और मस्जिद प्रबंधन से जुड़े लोगों ने प्रशासनिक कदम पर आपत्ति जताई।

पहले जारी हुआ था नोटिस
जानकारी के अनुसार, एमडीडीए ने 27 मई को मस्जिद प्रबंधन को सीलिंग संबंधी नोटिस भेजा था। इसके बाद सोमवार को प्राधिकरण की टीम मौके पर पहुंची और परिसर को सील कर दिया। यह मामला पिछले कई महीनों से सार्वजनिक चर्चा का विषय बना हुआ था तथा विभिन्न संगठनों द्वारा इस संबंध में प्रदर्शन भी किए जाते रहे थे।

क्या है पूरा मामला?
विवाद डोईवाला के थानों क्षेत्र स्थित कंडोगल कुड़ियाल गांव से जुड़ा है। आरोप है कि लगभग 800 वर्ग फीट क्षेत्र में बने दो मंजिला आवासीय भवन का उपयोग मस्जिद के रूप में किया जा रहा था। बताया गया कि इसका संचालन इंतजामिया कमेटी जामा मस्जिद द्वारा किया जा रहा था। परिसर में मदरसा चलने की बात भी सामने आई थी। इसी मुद्दे को लेकर हिंदू संगठन देवभूमि काली सेना लंबे समय से कार्रवाई की मांग कर रहा था। संगठन के कार्यकर्ता समय-समय पर परिसर के बाहर प्रदर्शन भी कर चुके हैं।

मुस्लिम पक्ष ने उठाए सवाल
स्थानीय मुस्लिम समुदाय और मस्जिद प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि हालिया नोटिस में केवल 20×40 फीट क्षेत्र के संबंध में कार्रवाई का उल्लेख था। उनका आरोप है कि इसके बावजूद पूरे मस्जिद परिसर को सील कर दिया गया, जिससे लोगों में असंतोष है।

उनका यह भी कहना है कि इससे पहले परिसर के एक कमरे को सील किया जा चुका था। स्थानीय लोगों के मुताबिक यह कमरा इमाम के आवास के लिए बनाया गया था और वर्ष 2023 में अल्पसंख्यक विभाग की स्वीकृति के बाद पेयजल विभाग द्वारा इसका निर्माण कराया गया था। हालांकि भवन का नक्शा स्वीकृत न होने के कारण रमजान से लगभग तीन महीने पहले उस हिस्से को सील कर दिया गया था।

एमडीडीए का पक्ष
प्राधिकरण के अभिलेखों के अनुसार, उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास अधिनियम-1973 के कथित उल्लंघन के आधार पर 17 दिसंबर 2025 को भवन की पहली मंजिल पर पहले भी सीलिंग की कार्रवाई की गई थी।

एमडीडीए का कहना है कि इसके बाद इंतजामिया कमेटी को आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कई अवसर दिए गए। इनमें भवन का स्वीकृत नक्शा, वक्फ बोर्ड की अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी), मदरसे की मान्यता और अन्य जरूरी अभिलेख शामिल थे। अधिकारियों का दावा है कि तय समय सीमा के भीतर अपेक्षित दस्तावेज जमा नहीं कराए गए। साथ ही परिसर में शैक्षणिक गतिविधियां जारी रहने की जानकारी भी सामने आई थी।

जमीन दान करने वाले व्यक्ति ने भी जताई चिंता
जमीन के स्वामित्व का दावा करने वाले दिलशाद ने बताया कि उन्होंने वर्षों पहले यह भूमि मस्जिद के उपयोग के लिए दान की थी। उनका कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि पूरे परिसर को सील करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने यह भी कहा कि नोटिस में उल्लिखित कार्रवाई और वास्तविक कार्रवाई के बीच अंतर दिखाई देता है, जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

पुलिस की मौजूदगी में पूरी हुई कार्रवाई
सोमवार सुबह एमडीडीए की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने परिसर के विभिन्न कमरों के अलावा मुख्य प्रवेश द्वार पर भी सील लगा दी। पूरी प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। कार्रवाई के समय मौजूद कई लोगों ने प्रशासन के निर्णय पर नाराजगी व्यक्त की और अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। हालांकि पूरे घटनाक्रम के दौरान स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही।

काली सेना ने पहले दी थी आंदोलन की चेतावनी
देवभूमि काली सेना इस मामले को लेकर लगातार प्रशासन पर दबाव बना रही थी। संगठन ने पूर्व में सांकेतिक प्रदर्शन करते हुए कार्रवाई की मांग की थी। पदाधिकारियों का कहना था कि यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होती तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। सुरक्षा संबंधी पहलुओं को देखते हुए एमडीडीए ने पहले ही पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था, जिसके बाद सोमवार को सुरक्षा व्यवस्था के बीच सीलिंग की प्रक्रिया पूरी की गई।

स्थानीय महिला ने भी उठाए सवाल
करीब 35 वर्षों से क्षेत्र में रहने वाली 60 वर्षीय रजिया ने कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यह जमीन लंबे समय से स्थानीय लोगों के उपयोग में रही है और उन्हें पहले किसी विवाद की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि अचानक हुई कार्रवाई से क्षेत्र के लोग आश्चर्य में हैं। रजिया का आरोप है कि इलाके में अन्य निर्माण भी हुए हैं, लेकिन कार्रवाई केवल इसी परिसर पर की गई। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले में स्पष्टता लाने और लोगों को विस्तृत जानकारी देने की मांग की।

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