
Rajkumar Dhiman, Dehradun: देहरादून के राजकीय पॉलिटेक्निक, पित्थूवाला में परीक्षा के दौरान नकल के संदेह से शुरू हुआ विवाद अब उत्तराखंड पुलिस के एक दरोगा के निलंबन तक पहुंच गया है। मामले में नया और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) देहरादून ने पुलिस दूरसंचार शाखा में तैनात उपनिरीक्षक (दरोगा) महेश कंडवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
एसएसपी कार्यालय से जारी प्रेस नोट के अनुसार, 5 जून को पित्थूवाला पॉलिटेक्निक कॉलेज में शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ मारपीट तथा सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने की घटना का संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की गई है। पुलिस विभाग ने माना कि पद की गरिमा के अनुरूप व्यवहार न करने के आरोपों को गंभीरता से लिया गया है। मामले की जांच जारी है।
परीक्षा के दौरान नकल के संदेह से शुरू हुआ विवाद
पूरा विवाद 4 जून को आयोजित फाइनल ईयर सिविल इंजीनियरिंग की परीक्षा के दौरान शुरू हुआ। कॉलेज प्रशासन के अनुसार परीक्षा कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरों में छात्र कबीर कंडवाल की गतिविधियां रिकॉर्ड हुईं। आरोप है कि वह बार-बार पीछे बैठे दूसरे छात्र की ओर मुड़कर बातचीत करने की कोशिश कर रहा था और एक बार अपनी सीट छोड़कर दूसरे छात्र की सीट तक भी पहुंच गया था।
परीक्षा समाप्त होने के बाद नियंत्रण समिति ने सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की और दोनों छात्रों को पूछताछ के लिए बुलाया। शिक्षकों का कहना है कि छात्र से लिखित स्पष्टीकरण और माफीनामा मांगा गया था। इसी दौरान उसने कथित रूप से बताया कि उसके पिता पुलिस विभाग में कार्यरत हैं। हालांकि, संस्थान प्रशासन ने छात्र के भविष्य को देखते हुए उसके खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई नहीं की और उसे दोबारा परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी।
अगले दिन कॉलेज पहुंचा छात्र का परिवार, शिक्षकों ने लगाए मारपीट के आरोप
शिक्षकों और कर्मचारियों के अनुसार 5 जून को छात्र अपने पिता महेश कंडवाल, मामा और अन्य परिजनों के साथ कॉलेज पहुंचा। आरोप है कि समूह सीधे परीक्षा नियंत्रण कक्ष में घुस गया और वहां मौजूद शिक्षकों तथा कर्मचारियों के साथ अभद्रता शुरू कर दी।
कर्मचारियों का दावा है कि कुछ लोगों ने थप्पड़ मारे, गाली-गलौज की और कुर्सियां उठाकर धमकाया। घटना के दौरान नियंत्रण कक्ष में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। विवाद का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कॉलेज परिसर के भीतर हंगामा और धक्का-मुक्की दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।
वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर और बढ़ा विवाद
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब कुछ शिक्षक और कर्मचारी मोबाइल फोन से घटना की रिकॉर्डिंग करने लगे तो विवाद और बढ़ गया। आरोप है कि रिकॉर्डिंग रोकने की कोशिश की गई और इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। महिला कर्मचारियों ने भी आरोप लगाया कि हंगामे के दौरान कुछ महिलाओं ने उनके साथ धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किया।
शिक्षकों और कर्मचारियों ने किया विरोध प्रदर्शन
घटना के विरोध में संस्थान के शिक्षक और कर्मचारी अगले दिन काली पट्टी बांधकर कार्यस्थल पहुंचे। उन्होंने कॉलेज परिसर में सुरक्षा सुनिश्चित करने और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने छात्र के भविष्य को ध्यान में रखते हुए नरमी बरती थी, लेकिन इसके बावजूद उनके साथ मारपीट और अभद्रता की गई, जो बेहद गंभीर मामला है।
छात्र पक्ष ने लगाए पलटवार में आरोप
दूसरी ओर छात्र के परिजनों ने शिक्षकों के आरोपों को खारिज किया है। परिवार का कहना है कि छात्र ने नकल नहीं की थी और उसे अनावश्यक रूप से परेशान किया गया। उनका आरोप है कि परीक्षा के दौरान छात्र के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई थी, जिसके चलते उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
दोनों पक्षों की शिकायत पर मुकदमा दर्ज
मामले में छात्र पक्ष और कॉलेज प्रशासन, दोनों ने पटेल नगर थाने में शिकायत दी है। पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीरों के आधार पर मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, वायरल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों की समीक्षा की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
निलंबन से मिला स्पष्ट संदेश
ताजा घटनाक्रम में दरोगा महेश कंडवाल के निलंबन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस विभाग ने प्रारंभिक स्तर पर यह संदेश दिया है कि यदि कोई पुलिसकर्मी अपने पद की गरिमा के विपरीत आचरण करता है या किसी शासकीय संस्थान में जाकर कानून व्यवस्था प्रभावित करने के आरोपों में घिरता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। अब पूरे मामले की नजर पुलिस जांच पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि परीक्षा कक्ष में कथित नकल, छात्र के साथ हुए व्यवहार और कॉलेज में हुई मारपीट की घटना में वास्तविक जिम्मेदारी किसकी थी।



