सगी चाची का रेप किया और फिर अपनी ही बेटी की इज्जत पर डाला हाथ
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दुष्कर्मी पिता को 10 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई

Round The Watch News: पिता-पुत्री जैसे पवित्र रिश्ते को शर्मसार करने वाले एक सनसनीखेज मामले में हरिद्वार की फास्ट ट्रैक विशेष अदालत ने अपनी ही नौ वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म का प्रयास करने वाले व्यक्ति को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना जमा न करने पर उसे अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अपर सत्र न्यायाधीश चंद्रमणि राय की अदालत ने मामले में प्रस्तुत गवाहों, मेडिकल रिपोर्ट, वैज्ञानिक साक्ष्यों और अन्य साक्ष्य सामग्री का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी कई महीनों तक अपनी बेटी का मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न करता रहा तथा विरोध करने पर पत्नी और बच्ची को जान से मारने की धमकी देता था।
तीन महीने तक मासूम को बनाता रहा शिकार
अभियोजन के अनुसार श्यामपुर क्षेत्र निवासी आरोपी ने वर्ष 2022 में करीब तीन महीनों तक अपनी नौ वर्षीय बेटी को निशाना बनाया। घर में अकेलेपन का फायदा उठाकर वह बच्ची के साथ अश्लील हरकतें करता था और कई बार दुष्कर्म का प्रयास भी किया। आरोपी की धमकियों और भय के कारण मासूम लंबे समय तक चुप रही और किसी को कुछ नहीं बता सकी।
मां को बताई आपबीती, विरोध करने पर की मारपीट
मामले का खुलासा 7 अक्टूबर 2022 को हुआ, जब फैक्ट्री से घर लौटी मां के सामने बच्ची रो पड़ी और उसने अपने साथ हो रही घटनाओं की जानकारी दी। आरोप है कि जब पत्नी ने आरोपी का विरोध किया तो उसने उसके साथ मारपीट की।
अभियोजन के मुताबिक इसके बाद भी आरोपी नहीं माना। एक रात वह फिर बच्ची के बिस्तर तक पहुंच गया और जबरन दुष्कर्म का प्रयास किया। बच्ची के शोर मचाने पर उसकी मां की नींद खुल गई और उसने तत्काल हस्तक्षेप कर बेटी को बचा लिया।
शिकायत के बाद पुलिस ने किया गिरफ्तार
घटना के बाद पीड़िता की मां ने श्यामपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। विवेचना पूरी होने के बाद मामला अदालत में चला, जहां अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए।
नौ गवाहों ने मजबूत किया अभियोजन का पक्ष
शासकीय अधिवक्ता भूपेंद्र चौहान के अनुसार अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह पेश किए गए, जबकि न्यायालय की ओर से एक स्वतंत्र गवाह का परीक्षण किया गया। बचाव पक्ष की ओर से केवल आरोपी ने स्वयं गवाही देकर खुद को निर्दोष साबित करने का प्रयास किया।
अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट, वैज्ञानिक साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और दोनों पक्षों की दलीलों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी माना और उसे 10 वर्ष के कठोर कारावास तथा 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
पहले से गंभीर अपराधों में भी घिरा है आरोपी
सुनवाई के दौरान आरोपी का आपराधिक इतिहास भी अदालत के समक्ष रखा गया। अभियोजन पक्ष ने बताया कि उसके खिलाफ पहले से अपनी सगी चाची के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या से जुड़ा मुकदमा विचाराधीन है। कोरोना काल में वह जेल से पैरोल अथवा जमानत पर बाहर आया था।
अभियोजन के अनुसार जेल से बाहर आने के बाद भी उसकी आपराधिक प्रवृत्ति में कोई बदलाव नहीं आया और उसने अपनी ही बेटी को निशाना बनाने का प्रयास किया। अदालत ने आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड, विश्वास के रिश्ते के दुरुपयोग और अपराध की गंभीरता को देखते हुए किसी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया। फैसले के बाद पीड़िता के परिजनों ने न्यायालय के निर्णय पर संतोष व्यक्त करते हुए राहत की सांस ली।



