भ्रष्टाचार के आरोपों में सतपुली नगर पंचायत अध्यक्ष जितेंद्र चौहान के वित्तीय-प्रशासनिक अधिकार सीज, एडीएम पौड़ी को जिम्मेदारी
जांच समिति की रिपोर्ट में तीन आरोप सही पाए जाने का दावा, शासन ने 15 दिन में मांगा जवाब; पद से हटाने की भी चेतावनी

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड शासन ने पौड़ी जिले की सतपुली नगर पंचायत के अध्यक्ष जितेंद्र चौहान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार तत्काल प्रभाव से सीज कर दिए हैं। नगर पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने यह कार्रवाई की है। अध्यक्ष के अधिकार अपर जिलाधिकारी (एडीएम), पौड़ी को सौंप दिए गए हैं। साथ ही जितेंद्र चौहान को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। शासन ने उनसे पूछा है कि उन्हें अध्यक्ष पद से क्यों न हटा दिया जाए।
आरटीआई से सामने आईं अनियमितताएं
मामले की शुरुआत जुलाई 2025 में हुई, जब सामाजिक कार्यकर्ता रविंद्र रावत और शशांक घिल्डियाल ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत नगर पंचायत के खर्चों की जानकारी प्राप्त की। उपलब्ध कराई गई सूचनाओं में कथित अनियमितताएं सामने आने के बाद दोनों ने शासन से मामले की जांच कराने की मांग की।
पांच सदस्यीय समिति ने की जांच
शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए शासन ने एसडीएम सतपुली की अध्यक्षता में पांच अधिकारियों की जांच समिति गठित की। समिति ने मामले की जांच कर सितंबर में अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंप दी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, जांच रिपोर्ट में अध्यक्ष के विरुद्ध लगाए गए तीन प्रमुख आरोप सही पाए गए।
निजी पेट्रोल पंप से ईंधन खरीदने का आरोप
जांच में सामने आया कि नगर पंचायत के वाहनों और जनरेटरों के लिए ईंधन की खरीद अध्यक्ष के निजी पेट्रोल पंप से की जा रही थी। आरोप है कि यह खरीद निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं थी। इस मामले को पद के दुरुपयोग और निजी हितों से जुड़े संभावित लाभ के तौर पर देखा गया है।
बिना तकनीकी राय और टेंडर के पार्किंग ध्वस्त
दूसरा आरोप नगर पंचायत की एक पार्किंग को ध्वस्त करने से संबंधित है। आरोप है कि पार्किंग को गिराने से पहले न तो तकनीकी समिति की राय ली गई और न ही निर्धारित निविदा प्रक्रिया का पालन किया गया। इससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचने का मामला सामने आया।
निविदाओं को छोटे हिस्सों में बांटने का आरोप
तीसरा आरोप विकास कार्यों की निविदाओं में अनियमितता से जुड़ा है। जांच में बड़े कार्यों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर ई-टेंडरिंग प्रक्रिया से बचने और चुनिंदा ठेकेदारों को काम देने का मामला सामने आने की बात कही गई है। इसे वित्तीय नियमों के उल्लंघन से जोड़कर देखा गया है।
जवाब संतोषजनक नहीं तो पद से हटाने की कार्रवाई
शासन ने फिलहाल अध्यक्ष के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज करते हुए नगर पंचायत का प्रभार एडीएम पौड़ी को सौंप दिया है। जितेंद्र चौहान को जारी कारण बताओ नोटिस में 15 दिन के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा गया है। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत उन्हें अध्यक्ष पद से हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। इस कार्रवाई से सतपुली नगर पंचायत में हड़कंप है। हालांकि, अध्यक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है और आगे की कार्रवाई शासन के निर्णय तथा लागू कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।



