हाई स्कूल में महज 74 प्रतिशत और इंटर में मानसी ने हासिल कर डाले 94.6 प्रतिशत अंक, मेरिट में बनाई जगह
मूल रूप से चमोली की थराली निवासी मानसी ने पढाई की रणनीति बदली तो नतीजा भी बदल गया

Rajkumar Dhiman, Dehradun: कभी 72 प्रतिशत अंकों तक सीमित रहने वाली मानसी ने खुद को वहीं नहीं रोका। हाई स्कूल के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई का तरीका बदला और उसी बदलाव ने उन्हें इंटरमीडिएट में 94.6 प्रतिशत तक पहुंचा दिया। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने प्रदेश में 14वीं और देहरादून में दूसरा स्थान हासिल किया।
चमोली जिले के थराली क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाली मानसी इन दिनों देहरादून में अपने दादा के साथ रहकर पढ़ाई कर रही हैं। पिता इंदौर में इंजीनियर हैं और मां गृहिणी हैं। परिवार से दूर रहना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने इसे कमजोरी बनाने के बजाय अपनी ताकत बना लिया।
हाई स्कूल के बाद मानसी ने सबसे बड़ा बदलाव अपनी पढ़ाई की शैली में किया। उन्होंने रटकर पढ़ने की आदत छोड़ दी और विषयों को समझने पर फोकस किया। इसके साथ ही उन्होंने अपने समय को बेहतर तरीके से बांटना शुरू किया और रोजाना तय घंटों तक नियमित पढ़ाई को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। यही अनुशासन उनकी सफलता की नींव बना।
मानसी का कहना है कि अगर सही दिशा मिल जाए तो मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। वह अपनी शिक्षिका और स्कूल के अन्य शिक्षकों को इसका श्रेय देती हैं, जिन्होंने उन्हें पढ़ाई का सही तरीका सिखाया। उनकी प्रेरणा उनकी बड़ी बहन हैं, और उनका लक्ष्य सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा करना है।
यह सफलता उनके लिए सिर्फ अंक हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके बड़े सपने की ओर बढ़ता एक अहम कदम है। मानसी की कहानी यह बताती है कि शुरुआत कैसी भी हो, अगर मेहनत सही दिशा में की जाए तो मंजिल बदली जा सकती है।



