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देहरादून में नामी बिल्डर पुनीत को डीएम ने किया जिला बदर, एटीएस कॉलोनी में बन गया था ‘आतंक का पर्याय’

हाल में DRDO वैज्ञानिक का फाड़ दिया था कान का पर्दा, बच्चों पर तानी थी पिस्टल,अब 6 महीने के लिए जिला बदर हुआ पुनीत अग्रवाल

Round The Watch Team: देहरादून में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले और कॉलोनियों में दहशत का माहौल बनाने वाले तत्वों के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और सबसे सख्त कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। सहस्रधारा रोड स्थित प्रतिष्ठित एटीएस कॉलोनी में लंबे समय से दबंगई, मारपीट, धमकी और भय का पर्याय बने विवादित बिल्डर पुनीत अग्रवाल को जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड गुंडा नियंत्रण अधिनियम-1970 के तहत “गुंडा” घोषित करते हुए छह महीने के लिए देहरादून जनपद से जिला बदर कर दिया है।

यह कार्रवाई केवल एक झगड़े या एफआईआर तक सीमित नहीं रही। जिला प्रशासन ने आरोपी के खिलाफ लगातार सामने आ रही शिकायतों, वायरल वीडियो, महिलाओं और बुजुर्गों से अभद्रता, बच्चों को धमकाने, हथियार लहराने, मारपीट, कथित अवैध कब्जों और पूरे क्षेत्र में भय का वातावरण बनाने जैसे मामलों को आधार बनाते हुए कठोर कदम उठाया। जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट ने साफ कहा कि आरोपी “अभ्यस्त आपराधिक प्रवृत्ति” का व्यक्ति है और उसकी गतिविधियां समाज के लिए खतरा बन चुकी थीं।

DRDO वैज्ञानिक के परिवार पर हमला बना टर्निंग पॉइंट
बिल्डर पुनीत अग्रवाल की गुंडागर्दी का हालिया मामला 13 अप्रैल 2026 को सामने आए उस विवाद से जुड़ा है, जिसने एटीएस कॉलोनी के भीतर चल रही कथित दबंगई की सभी परतें खोल दीं। आरोप है कि बिल्डर पुनीत अग्रवाल नगर निगम और एमडीडीए की भूमि पर दीवार निर्माण करा रहा था। निर्माण का मलबा पड़ोसी मकानों की ओर गिर रहा था।

जब डीआरडीओ में तैनात वैज्ञानिक अनिरुद्ध शर्मा और उनके परिवार ने इसका विरोध किया तो विवाद हिंसक हो गया। शिकायत के अनुसार पुनीत अग्रवाल ने न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया बल्कि वैज्ञानिक के साथ मारपीट भी कर दी। मारपीट इतनी गंभीर थी कि घायल वैज्ञानिक का कान का पर्दा फट गया।

शिकायत में यह भी कहा गया कि महिलाओं और बुजुर्गों के साथ गाली-गलौज और अभद्रता की गई। घटना के बाद पूरी कॉलोनी में भारी आक्रोश फैल गया और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग थाना रायपुर पहुंचे। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

“कॉलोनी में भय का माहौल था”, नागरिकों ने उठाई आवाज
25 अप्रैल 2026 को डीआरडीओ वैज्ञानिक हेम शिखा सहित कई निवासियों ने जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायती प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि पुनीत अग्रवाल लंबे समय से कॉलोनी में आतंक का माहौल बना रहा है। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि आरोपी महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को डराने-धमकाने का आदी है। वह छोटी-छोटी बातों पर गाली-गलौज, मारपीट और धमकी देता है। निवासियों का आरोप था कि आरोपी झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देता था और आरडब्ल्यूए सदस्यों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था। कई परिवारों ने कहा कि वे लगातार भय और तनाव में जीवन जी रहे थे।

डीएम ने कराई गोपनीय जांच, रिपोर्ट में खुला ‘दबंगई मॉडल’, वायरल वीडियो भी बने सबूत
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने उप जिलाधिकारी मसूरी से गोपनीय जांच कराई। जांच में स्थानीय लोगों ने बताया कि पुनीत अग्रवाल का व्यवहार लगातार भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा कर रहा था। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि आरोपी छोटी-छोटी बातों पर लोगों को धमकाता है और क्षेत्र में उसका व्यवहार अशांति फैलाने वाला है।

प्रशासन ने थाना रायपुर में दर्ज एफआईआर, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो क्लिप्स और स्थानीय निवासियों की सामूहिक शिकायतों को भी गंभीरता से लिया। अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्य उसके आपराधिक और भय पैदा करने वाले व्यवहार की पुष्टि करते हैं।

DRDO निदेशक भी आए सामने, आरोपी पर नहीं लगी लगाम तो हो सकती है बड़ी घटना
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं निदेशक मनोज कुमार ढाका ने भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि पुनीत अग्रवाल का व्यवहार समाज में भय और असुरक्षा का कारण बन चुका है। यदि उस पर रोक नहीं लगाई गई तो कभी भी कोई गंभीर अप्रिय घटना हो सकती है। सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि एटीएस कॉलोनी के आठ फ्लैट मालिकों ने सामूहिक शिकायत देकर आरोपी और उसके परिवार से भय का माहौल होने की बात कही थी।

बचाव पक्ष बोला, सिविल विवाद है, डीएम कोर्ट में नहीं चली दलील
सुनवाई के दौरान पुनीत अग्रवाल की ओर से पूरे मामले को आपसी रंजिश और सिविल विवाद बताया गया। बचाव पक्ष ने दावा किया कि यह केवल जमीन और संपत्ति से जुड़ा विवाद है, जिसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।

लेकिन जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने पुलिस रिकॉर्ड, वायरल वीडियो, शिकायतों और गोपनीय जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी लगातार लोगों को डराने-धमकाने और क्षेत्र में अशांति फैलाने का आदी है। अदालत ने साफ कहा कि यह केवल सिविल विवाद नहीं बल्कि समाज में भय का वातावरण बनाने का मामला है।

बच्चों पर पिस्टल लहराने का भी आरोपी, दीपावली पर हथियार दिखाने पर पहले ही सस्पेंड हो चुका था लाइसेंस
यह पहला मौका नहीं है जब पुनीत अग्रवाल पर प्रशासन ने कठोर कार्रवाई की हो। इससे पहले दीपावली के दौरान नाबालिग बच्चों पर पिस्टल लहराने और लाइसेंसी हथियार का सार्वजनिक प्रदर्शन करने का मामला सामने आया था। तब जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने स्वतः संज्ञान लेते हुए आरोपी का शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिया था और हथियार जब्त करने की कार्रवाई कराई थी।

स्थानीय लोगों के अनुसार आरोपी पर नशे की हालत में आरडब्ल्यूए अध्यक्ष से मारपीट, बच्चों को गालियां देने, गाड़ी से टक्कर मारने की कोशिश करने और जनरल बॉडी मीटिंग में लोगों को धमकाने जैसे आरोप पहले भी लगते रहे हैं।

विधवा महिला की जमीन पर कब्जे के भी आरोप
प्रशासन की ओर से जारी प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि आरोपी पर एक विधवा महिला की भूमि को कथित रूप से कूटरचित रजिस्ट्री और अनाधिकृत कब्जे के जरिए हथियाने के आरोप भी लगे हैं। इसके अलावा आरडब्ल्यूए सदस्यों और निवासियों को झूठे मुकदमों और निराधार आरोपों में फंसाकर उत्पीड़न करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया गया है।

पांच मुकदमे पहले से दर्ज: मारपीट, धमकी और अतिक्रमण जैसी धाराओं में घिरा बिल्डर
जिला प्रशासन ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पुनीत अग्रवाल के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं में पांच मुकदमे पहले से दर्ज हैं। इनमें धारा 115(2), 351(2), 352, 74, 126(2), 324(4) और 447 शामिल हैं। इन धाराओं में मारपीट, धमकी, उत्पीड़न, अभद्र व्यवहार और अतिक्रमण जैसे आरोप शामिल हैं। प्रशासन ने माना कि लगातार दर्ज हो रहे मुकदमे आरोपी की आपराधिक प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।

अब छह महीने तक देहरादून में एंट्री बैन, आदेश तोड़ा तो होगी जेल और जुर्माने की कार्रवाई
जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने आदेश दिया है कि पुनीत अग्रवाल अगले छह माह तक बिना अनुमति देहरादून जनपद की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकेगा। यदि किसी कानूनी प्रक्रिया के लिए उसे देहरादून आना पड़े तो पहले न्यायालय से अनुमति लेनी होगी। उसे अपना अस्थायी निवास पता रायपुर थाने में उपलब्ध कराना होगा। आदेश का उल्लंघन करने पर कठोर कारावास और जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। रायपुर थाना पुलिस को आदेश की तत्काल तामील कराते हुए आरोपी को 24 घंटे के भीतर जनपद से बाहर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

डीएम सविन बंसल का साफ संदेश
जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने साफ संकेत दिया है कि कानून हाथ में लेने वाले, कॉलोनियों में भय का माहौल बनाने वाले और महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले लोगों के खिलाफ जिला प्रशासन अब जीरो टॉलरेंस नीति पर काम करेगा। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि आमजन की सुरक्षा से समझौता करने वाले किसी भी व्यक्ति को किसी कीमत पर बख्शा न जाए। देहरादून में इस कार्रवाई को अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के खिलाफ एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। एटीएस कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि लंबे समय बाद उन्हें राहत और सुरक्षा का एहसास हुआ है।

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