Dehradundm dehradunUttarakhand

मुख्यमंत्री से की गई 345 शिकायतों को दबाकर बैठा स्वास्थ्य विभाग, डीएम ने घुमाया डंडा

सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतों का बढ़ता बोझ, 2100 से अधिक मामले लंबित, स्वास्थ्य विभाग की हालत खराब

Rajkumar Dhiman, Dehradun: मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1905 पर लंबित शिकायतों की बढ़ती संख्या ने जिला प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा के दौरान सामने आए आंकड़ों पर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने नाराजगी जताते हुए संबंधित विभागों को चेतावनी पत्र जारी करने के निर्देश दिए। वहीं, समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग का कोई प्रतिनिधि उपस्थित न होने पर मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

समीक्षा के दौरान पता चला कि विभिन्न विभागों में कुल 2100 से अधिक शिकायतें लंबित हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसी शिकायतों की भी है, जिनका निर्धारित समय सीमा के भीतर समाधान नहीं हो पाया है। जिलाधिकारी ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए विभागीय अधिकारियों को जवाबदेही तय करने की चेतावनी दी।

शहरी विकास विभाग में सबसे ज्यादा लंबित मामले
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के लेवल-1 (एल1) पर सबसे अधिक 384 शिकायतें शहरी विकास विभाग में लंबित पाई गईं। इसके बाद पुलिस विभाग में 309, लोक निर्माण विभाग में 299, ऊर्जा विभाग में 234, जल संस्थान में 183 तथा राजस्व विभाग में 174 शिकायतें लंबित दर्ज की गईं।

स्वास्थ्य विभाग की स्थिति सबसे चिंताजनक
36 दिन से अधिक समय से लंबित मामलों की समीक्षा में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला विभाग सामने आया। विभाग की 345 शिकायतें निर्धारित समय सीमा पार कर चुकी हैं। इसके अलावा शहरी विकास विभाग की 237, राजस्व विभाग की 225, पुलिस विभाग की 133 तथा तकनीकी शिक्षा विभाग की 111 शिकायतें भी लंबे समय से निस्तारण की प्रतीक्षा में हैं।

शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर जोर
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा दिए गए “सरलीकरण, समाधान, निस्तारण एवं संतुष्टि” के सिद्धांत के अनुरूप शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने प्रत्येक विभाग में टास्क ऑफिसर नामित करने, शिकायतों की दैनिक निगरानी करने और शिकायतकर्ताओं से सीधे संवाद स्थापित करने के निर्देश दिए।

हर 10 दिन में होगी समीक्षा
डॉ. चौहान ने स्पष्ट किया कि बड़े विभागों में लंबित शिकायतों की संख्या तीन अंकों से अधिक और छोटे विभागों में दो अंकों से अधिक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की समीक्षा हर 10 दिन में की जाएगी तथा शिकायतकर्ताओं से सीधे फीडबैक लेकर निस्तारण की गुणवत्ता का आकलन किया जाएगा।

समझिए शिकायतों के चार स्तर
लेवल-1 (एल1): शिकायत सबसे पहले संबंधित विभाग या स्थानीय अधिकारी के पास पहुंचती है और प्राथमिक स्तर पर इसका समाधान किया जाना अपेक्षित होता है।

लेवल-2 (एल2): तय समय में समाधान न होने या शिकायतकर्ता की असंतुष्टि की स्थिति में मामला वरिष्ठ अधिकारी के पास भेजा जाता है।

लेवल-3 (एल3): शिकायत लंबित रहने पर जिला स्तर और उच्च अधिकारियों द्वारा इसकी समीक्षा की जाती है।

लेवल-4 (एल4): गंभीर या लगातार लंबित मामलों की निगरानी शासन अथवा शीर्ष स्तर पर की जाती है।

जिलाधिकारी ने संकेत दिए कि शिकायत निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले विभागों और अधिकारियों के खिलाफ आगे भी जवाबदेही तय की जाएगी, ताकि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन आम लोगों की समस्याओं के प्रभावी समाधान का माध्यम बनी रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button