
Rajkumar Dhiman, Dehradun: देहरादून के रक्षा अनुसंधान विद्यालय (RAV) में दो से तीन दशक से पढ़ा रहे शिक्षकों और कर्मचारियों को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने साफ कर दिया है कि मामले की अगली सुनवाई तक न तो उनकी सेवा शर्तों से छेड़छाड़ होगी और न ही वेतन ढांचे में कोई बदलाव किया जाएगा। कोर्ट ने फिलहाल स्टेटस क्वो (यथास्थिति) बनाए रखने का आदेश दिया है।
यह मामला उस विवाद से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि स्कूल का प्रबंधन बदलने के बाद वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को नई संविदा पर आधे वेतन में नियुक्त करने की तैयारी की जा रही थी। इसी आशंका को लेकर कर्मचारियों ने अदालत का रुख किया था।
हाई कोर्ट का सख्त रुख, कहा- फिलहाल कुछ नहीं बदलेगा
दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने 27 जुलाई को सुनवाई के दौरान कहा कि कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा के लिए मौजूदा स्थिति बनाए रखना जरूरी है। अदालत ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि रक्षा अनुसंधान विद्यालय, देहरादून के याचिकाकर्ता कर्मचारियों की सेवा शर्तों में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा।
साथ ही केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को होगी।
DAV को सौंपा गया प्रबंधन, यहीं से शुरू हुआ पूरा विवाद
विवाद की शुरुआत 20 अप्रैल 2026 से हुई, जब रक्षा अनुसंधान शैक्षिक सोसायटी (DRES) से विद्यालय का संचालन दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज ट्रस्ट एंड मैनेजमेंट सोसायटी (DAV) को सौंप दिया गया।
प्रबंधन बदलने के बाद कर्मचारियों ने वेतन न मिलने की शिकायत की थी। इस पर हाई कोर्ट ने 14 मई और 21 मई को आदेश जारी कर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने को कहा था और स्पष्ट किया था कि प्रबंधन हस्तांतरण के बाद वेतन देने की जिम्मेदारी DAV की होगी।
NOC और सहमति पत्र बना नया विवाद
इसके बाद कर्मचारियों ने अदालत में अवमानना याचिका दाखिल करते हुए आरोप लगाया कि कोर्ट के आदेश के बावजूद वेतन नहीं दिया गया।
दूसरी ओर DAV का कहना था कि कर्मचारियों ने NOC और बिना शर्त सहमति पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज जमा नहीं किए, इसलिए वेतन रोका गया। साथ ही DAV ने यह भी दलील दी कि प्रबंधन बदलने के बाद कर्मचारियों को अब DAV के सेवा नियमों के तहत कार्य करना होगा। वहीं, कर्मचारियों का तर्क था कि सिर्फ प्रबंधन बदलने से 20-30 वर्षों की उनकी सेवा शर्तें स्वतः समाप्त नहीं हो सकतीं।
‘आधे वेतन पर संविदा’ की तैयारी का आरोप
DRDO Aided Schools Staff Association ने अदालत को बताया कि कर्मचारियों को नई संविदा पर नियुक्त करने और मौजूदा वेतन का लगभग 50 प्रतिशत ही देने की योजना बनाई जा रही है।
संघ ने कहा कि कई शिक्षक और कर्मचारी 20 से 30 वर्षों से विद्यालय में सेवाएं दे रहे हैं, ऐसे में उन्हें अचानक संविदा कर्मचारी बनाना और वेतन आधा करना उनके अधिकारों पर सीधा हमला है।
इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, कर्मचारियों की मौजूदा सेवा शर्तें और वेतन संरचना यथावत रहेगी।
अन्य DRDO स्कूलों पर भी अदालत की नजर
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि फिलहाल केवल देहरादून के रक्षा अनुसंधान विद्यालय का ही प्रबंधन DAV को सौंपा गया है। अन्य DRDO सहायता प्राप्त स्कूलों के संबंध में अभी तक कोई एमओए (MoA) निष्पादित नहीं हुआ है। सरकार ने यह भी कहा कि शिक्षकों के सभी लंबित वेतन का भुगतान कर दिया गया है।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में अन्य DRDO स्कूलों के लिए भी प्रबंधन हस्तांतरण का समझौता किया जाता है, तो याचिकाकर्ता दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।



