
Rajkumar Dhiman, Dehradun: वसंत विहार क्षेत्र में बुजुर्ग महिला से चेन स्नेचिंग की घटना को अंजाम देने वाला 25 वर्षीय आरोपी पुलिस मुठभेड़ में घायल हो गया। पुलिस के मुताबिक, देर रात हरबंसवाला बैरियर पर चेकिंग के दौरान बिना नंबर की स्कूटी सवार इस युवक को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन वह पुलिस को चकमा देकर भाग निकला। पीछा किए जाने पर आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। पुलिस की जवाबी फायरिंग में उसके पैर में गोली लगी।
मुठभेड़ के बाद सामने आई आरोपी की आपराधिक कुंडली ने शहर में कानून-व्यवस्था और अपराधियों पर पुलिस की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस के अनुसार, महज 25 वर्ष की उम्र में आरोपी आकाश कुमार उर्फ तमंचा के खिलाफ देहरादून के अलग-अलग थानों में कुल 17 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें चोरी, लूट, चेन और मोबाइल स्नेचिंग, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट समेत कई गंभीर अपराध शामिल हैं।
खास बात यह है कि आपराधिक इतिहास में दर्ज कई मुकदमे हाल के वर्षों के हैं। आरोपी के खिलाफ 2025 और 2026 में भी कई मुकदमे दर्ज हुए हैं। इसके बावजूद वह जेल से बाहर आने के बाद फिर से कथित तौर पर अपराध की वारदातों को अंजाम देता रहा। पुलिस के मुताबिक आरोपी करीब एक माह पहले ही जेल से जमानत पर बाहर आया था।
हरबंसवाला बैरियर पर चेकिंग से शुरू हुआ घटनाक्रम
जनपद में प्रस्तावित वीवीआईपी कार्यक्रम के मद्देनजर एसएसपी देहरादून ने सभी थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की लगातार सघन चेकिंग करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत दून पुलिस द्वारा अंतर्जनपदीय और अंतरराज्यीय चेकपोस्ट के साथ ही आंतरिक मार्गों पर भी चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।
इसी क्रम में 18-19 अगस्त 2026 की देर रात वसंत विहार पुलिस हरबंसवाला बैरियर पर चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान सामने से बिना नंबर की नीले रंग की स्कूटी पर सवार एक व्यक्ति आता दिखाई दिया। संदिग्धता के आधार पर पुलिस ने उसे रुकने का इशारा किया, लेकिन स्कूटी सवार तेजी से वाहन चलाकर हरबंसवाला की ओर फरार हो गया।
मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तत्काल कंट्रोल रूम के माध्यम से आसपास के थानों को सूचना दी और संदिग्ध का पीछा शुरू किया। पुलिस के अनुसार, चाय बागान की ओर भागते समय आरोपी ने पुलिस टीम पर फायर कर दिया। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसमें आरोपी के पैर में गोली लग गई।
घायल आरोपी को पुलिस ने तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। घटना की जानकारी मिलने पर उच्चाधिकारी भी मौके पर पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
मुठभेड़ के बाद चेन, तमंचा और कारतूस बरामद
मुठभेड़ में घायल आरोपी की पहचान आकाश कुमार उर्फ तमंचा पुत्र जगदीश लाल, निवासी शिवाजी नगर जैन प्लॉट, थाना रायपुर, देहरादून, उम्र 25 वर्ष के रूप में हुई।
पुलिस ने मौके से उसके कब्जे से एक 315 बोर का तमंचा, एक जिंदा कारतूस, एक खोखा कारतूस, एक सोने की चेन और बिना नंबर की नीले रंग की स्कूटी बरामद की।
पुलिस के अनुसार, बरामद सोने की चेन के संबंध में पूछताछ करने पर आरोपी ने बताया कि उसने कुछ दिन पूर्व वसंत विहार क्षेत्र में एक बुजुर्ग महिला के गले से चेन छीनी थी। महिला से उसने रास्ता पूछने के बहाने बातचीत की और इसके बाद चेन झपट ली थी।
आरोपी के खिलाफ पुलिस टीम पर किए गए जानलेवा हमले के संबंध में थाना बसंत विहार में मु0अ0सं0 176/26, धारा 109/3(5) बीएनएस और 3/25/27 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
नशे की लत पूरी करने के लिए अपराध का दावा
पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह नशे का आदी है और अपनी नशे की लत तथा अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए चोरी, लूट और अन्य आपराधिक घटनाओं को अंजाम देता रहा है।
आरोपी के मुताबिक, वसंत विहार क्षेत्र में बुजुर्ग महिला से चेन स्नेचिंग के दौरान इस्तेमाल की गई स्कूटी उसने कोतवाली क्षेत्र से चोरी की थी। पुलिस से बचने के लिए उसने स्कूटी की नंबर प्लेट हटा दी थी।
आरोपी ने बताया कि चेन को बेचने की कोशिश की, लेकिन बिल नहीं होने के कारण उसे कोई खरीदार नहीं मिला। पुलिस के अनुसार, घटना वाली रात भी आरोपी बारिश और अंधेरे का फायदा उठाकर किसी अन्य वारदात को अंजाम देने की फिराक में घूम रहा था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी करीब पांच माह पूर्व वसंत विहार क्षेत्र में हुई मोबाइल स्नेचिंग की घटना में थाना वसंत विहार से जेल गया था और करीब एक माह पहले ही जमानत पर बाहर आया था।
25 साल की उम्र और 17 मुकदमे
आकाश कुमार उर्फ तमंचा का आपराधिक इतिहास पुलिस के मुताबिक इस प्रकार है—
1. मु0अ0सं0 74/2019, धारा 8/21 एनडीपीएस एक्ट, थाना बसंत विहार, देहरादून।
2. मु0अ0सं0 287/19, धारा 25/4 आर्म्स एक्ट, थाना रायपुर, देहरादून।
3. मु0अ0सं0 399/19, धारा 457/380 भादवि, कोतवाली कैंट, देहरादून।
4. मु0अ0सं0 127/20, धारा 379/411 भादवि, थाना बसंत विहार, देहरादून।
5. मु0अ0सं0 67/21, धारा 379/411 भादवि, कोतवाली कैंट, देहरादून।
6. मु0अ0सं0 151/21, धारा 379/411 भादवि, थाना बसंत विहार, देहरादून।
7. मु0अ0सं0 28/22, धारा 25/4 आर्म्स एक्ट, कोतवाली कैंट, देहरादून।
8. मु0अ0सं0 158/22, धारा 25/4 आर्म्स एक्ट, थाना रायपुर, देहरादून।
9. मु0अ0सं0 16/23, धारा 379/411 भादवि, थाना रानीपोखरी, देहरादून।
10. मु0अ0सं0 220/24, धारा 303(2)/305(A)/317(2) बीएनएस, कोतवाली कैंट, देहरादून।
11. मु0अ0सं0 705/24, धारा 309(4)/317(2) बीएनएस व 25 आर्म्स एक्ट, कोतवाली पटेलनगर, देहरादून।
12. मु0अ0सं0 188/25, धारा 303(2)/317(2) बीएनएस, कोतवाली डोईवाला, देहरादून।
13. मु0अ0सं0 29/2026, धारा 304(2)/317(2) बीएनएस, थाना क्लेमेनटाउन, देहरादून।
14. मु0अ0सं0 72/2026, धारा 304(2)/317(2) बीएनएस, थाना बसंत विहार, देहरादून।
15. मु0अ0सं0 315/20, धारा 380/411 भादवि, थाना नेहरू कॉलोनी, देहरादून।
16. मु0अ0सं0 176/26, धारा 109/3(5) बीएनएस, थाना बसंत विहार, देहरादून।
17. मु0अ0सं0 298/26, धारा 303(2) बीएनएस, थाना कोतवाली नगर।
सवाल यह भी कि 25 साल की उम्र में इतनी लंबी अपराध की फेहरिस्त कैसे?
पुलिस की कार्रवाई में आरोपी पकड़ा गया और उसके कब्जे से हथियार, कारतूस, चेन और कथित तौर पर चोरी की गई स्कूटी बरामद हुई है। लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा किया है—महज 25 वर्ष की उम्र में किसी व्यक्ति के खिलाफ 17 मुकदमे दर्ज होने के बावजूद वह बार-बार जेल से बाहर आकर शहर में घूमता और कथित तौर पर नए अपराध करता रहा, तो निगरानी व्यवस्था में कहां कमी रह गई?
आपराधिक इतिहास में 2025 और 2026 के मुकदमे भी शामिल हैं। आरोपी पहले जेल जा चुका था और करीब एक माह पहले जमानत पर बाहर आया था। इसके बाद पुलिस के मुताबिक उसने फिर चेन स्नेचिंग की वारदात को अंजाम दिया और अगली वारदात की फिराक में घूम रहा था।
ऐसे आदतन अपराधियों का लगातार अपराध की दुनिया में सक्रिय रहना सीधे तौर पर आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। शहर में राह चलती बुजुर्ग महिलाओं से चेन स्नेचिंग जैसी घटनाएं सिर्फ सामान की चोरी नहीं, बल्कि नागरिकों के भीतर असुरक्षा और भय का माहौल भी पैदा करती हैं।
बरामदगी
– 315 बोर का एक तमंचा
– एक जिंदा कारतूस
– एक खोखा कारतूस
– घटना में छीनी गई सोने की चेन
– बिना नंबर की नीले रंग की एक स्कूटी
पुलिस की मुठभेड़ और गिरफ्तारी से तत्काल एक आरोपी पर कार्रवाई जरूर हुई है, लेकिन 25 साल की उम्र में 17 मुकदमों वाले आरोपी का बार-बार अपराध की ओर लौटना इस बात की ओर भी इशारा करता है कि ऐसे आदतन अपराधियों की जमानत के बाद निगरानी, आपराधिक नेटवर्क पर कार्रवाई और पुनः अपराध रोकने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है, इसकी भी समीक्षा जरूरी है। नागरिकों की सुरक्षा तभी सुनिश्चित हो सकती है, जब ऐसे अपराधियों पर कार्रवाई केवल वारदात के बाद नहीं, बल्कि अपराध की पुनरावृत्ति रोकने के स्तर पर भी प्रभावी हो।
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