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ब्रेकिंग: 34 बीएएमएस छात्रों का दाखिला निरस्त, बिना काउंसलिंग दे डाला था प्रवेश

हरिद्वार के दो निजी आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज से जुड़ा है प्रकरण, व्यवस्था पर उठे सवाल

Amit Bhatt, Dehradun: उत्तराखंड के दो निजी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों में नियमों के विपरीत दिए गए बीएएमएस प्रवेश अब 34 छात्रों के लिए बड़ी परेशानी बन गए हैं। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) ने सत्र 2022-23 के इन दाखिलों को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया है। साथ ही संबंधित छात्रों की आयुष आईडी जारी करने से भी इनकार कर दिया गया है।

कार्रवाई रुड़की स्थित कोर मेडिकल कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एंड हॉस्पिटल तथा हरिद्वार के अरोमा आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल पर हुई है। इनमें कोर कॉलेज के 20 और अरोमा कॉलेज के 14 छात्रों के प्रवेश अमान्य घोषित किए गए हैं। आयोग के अनुसार इन छात्रों को राज्य स्तरीय काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश नहीं मिला था।

एनसीआईएसएम ने 11 अप्रैल 2025 को जारी आदेश में स्पष्ट किया था कि बीएएमएस पाठ्यक्रम की सभी सीटों पर प्रवेश केवल केंद्रीय या राज्य स्तरीय काउंसलिंग के जरिए ही किए जा सकते हैं। विदेशी छात्रों को छोड़कर किसी भी श्रेणी में सीधे दाखिले की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद दोनों संस्थानों में छात्रों को सीधे प्रवेश दे दिए गए।

आयोग ने कॉलेजों के प्रवेश रिकॉर्ड का मिलान उत्तराखंड राज्य काउंसलिंग प्राधिकरण के आंकड़ों से किया। जांच में संबंधित छात्रों के नाम काउंसलिंग सूची में नहीं मिले। इसके बाद एनसीआईएसएम ने दोनों कॉलेजों को निर्देश दिया कि संबंधित छात्रों के प्रवेश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर उन्हें डिस्चार्ज किया जाए।

जानकारी के अनुसार प्रवेश निरस्त होने के बाद भी दोनों कॉलेजों ने छात्रों की आयुष आईडी जारी कराने के लिए आवेदन किए। कोर मेडिकल कॉलेज ने 13 मार्च और अरोमा कॉलेज ने 25 मार्च को आवेदन भेजे थे, लेकिन आयोग ने इन्हें क्रमशः 29 अप्रैल और 10 अप्रैल को खारिज कर दिया।

मामले में अब उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने भी हस्तक्षेप किया है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने दोनों कॉलेजों को पत्र भेजकर संबंधित छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को स्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही भविष्य में एनसीआईएसएम के नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही प्रवेश प्रक्रिया अपनाने को कहा गया है।

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल कॉलेजों की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। नियमों के विपरीत प्रवेश दिए जाने के बावजूद दो वर्षों तक छात्रों की पढ़ाई चलती रही और उनसे फीस भी ली जाती रही। अब अचानक दाखिले निरस्त होने से छात्र और अभिभावक खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। वहीं, छात्रों के शैक्षणिक भविष्य पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।

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