बबीता के साथ दयारा बुग्याल में क्या हुआ, पुलिस की खोज का तरीका कई सवालों को दे रहा जन्म
उत्तरकाशी पुलिस ने ट्रेकिंग रुट से गायब बबीता पांडे की खोज आबादी क्षेत्रों में भी करने के लिए जारी की सूचना

Amit Bhatt, Dehradun: अपने दो दोस्तों के साथ उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल ट्रेक पर 29 मई को निकली हल्द्वानी की 24 वर्षीय युवती बबीता पांडे के साथ ऐसा क्या हुआ कि उसका पता तीसरे दिन भी अबूझ पहेली बना है। उच्च हिमालयी क्षेत्र के ट्रेक में लगातार तीसरे दिन भी खोजबीन के बाद कोई जानकारी हाथ न लगने के बाद अब पुलिस ने गुमशुदगी की सामान्य सूचना जारी की है। उसका पता लगाने के लिए नागरिकों से मदद मांगी गई है। खोजबीन का यह तरीका कई सवालों को भी जन्म दे रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह कि उस दिन बबीता के साथ क्या हुआ था?
खैर, उत्तराखंड के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रेक से 24 वर्षीय युवती बबीता पांडे के लापता होने का मामला लगातार रहस्य गहराता जा रहा है। नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र की रहने वाली बबीता 29 मई को अपने दो साथियों के साथ दयारा बुग्याल ट्रेक पर गई थीं, लेकिन इसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल सका। परिजनों की शिकायत पर कोतवाली मनेरी में गुमशुदगी दर्ज कर पुलिस, वन विभाग, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त खोज अभियान चला रखा है।
पुलिस की ओर से जारी किए गए ताजा पोस्टर के अनुसार बबीता पांडे की लंबाई करीब 05 फीट, सामान्य कद-काठी, गेहुंआ रंग तथा काले-भूरे बाल हैं। गुमशुदगी का मुकदमा बीएनएसएस की धारा 140(3) के तहत दर्ज किया गया है।
दो दोस्तों के साथ गोई नामक स्थान पर रुकी और फिर हुई गायब
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बबीता अपने दो साथियों के साथ ट्रेक पर गई थीं और दयारा बुग्याल क्षेत्र में गोई नामक स्थान पर रुकी थीं। इसके बाद वह अचानक लापता हो गईं। पुलिस को घटना की सूचना भी कुछ देरी से मिली, जिससे शुरुआती घंटों में तलाश अभियान प्रभावित हुआ। इसने भी कई सवालों को जन्म दिया। फिर भी सूचना मिलते ही प्रशासन ने कई टीमें रवाना कर दीं और सर्च ऑपरेशन का दायरा बढ़ा दिया गया।
जंगल, घास के मैदान और खतरनाक ढलानों की खंगाली जा रही तलाशी
सोमवार तक मिली जानकारी के अनुसार खोज अभियान को और तेज कर दिया गया है। वन विभाग, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें दयारा बुग्याल के आसपास के जंगलों, ट्रेकिंग रूट, ढलानों और संभावित खाइयों की सघन तलाशी ले रही हैं। स्थानीय गाइडों और ग्रामीणों की भी मदद ली जा रही है। प्रशासन का फोकस उन इलाकों पर है जहां ट्रेक से भटकने की आशंका हो सकती है।
दयारा बुग्याल का भूगोल भी बना चुनौती
दयारा बुग्याल समुद्र तल से लगभग 2600 से 3500 मीटर की ऊंचाई तक फैला विशाल हिमालयी घास का मैदान है। यहां घने जंगल, ऊंची ढलानें और कई दुर्गम हिस्से हैं, जिससे किसी भी लापता व्यक्ति की तलाश कठिन हो जाती है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि हर संभावित दिशा में खोज की जा रही है और अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक युवती का पता नहीं चल जाता।
कई सवाल अभी भी अनुत्तरित
इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर ट्रेक के दौरान ऐसा क्या हुआ कि युवती अपने साथियों से अलग हो गई? क्या वह रास्ता भटक गई, किसी दुर्घटना का शिकार हुई या मामला कुछ और है? फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है और साथियों से भी विस्तृत पूछताछ की जा रही है। आधिकारिक तौर पर किसी आशंका की पुष्टि नहीं की गई है।



