अटक-अटक कर चल रही गोल्डन कार्ड की गाड़ी, एकजुट हुए कार्मिक संगठन तो सरकार ने मानी खामी
सचिवालय संघ की पहल पर गोल्डन कार्ड की खामियों पर सरकार का ध्यान खींचा गया, लंबित दावों के भुगतान के निर्देश

Rajkumar Dhiman, Dehradun: गोल्डन कार्ड योजना की खामियों और अक्टूबर 2025 से लंबित चिकित्सा दावों के भुगतान को लेकर सचिवालय संघ की पहल पर मंगलवार, 11 अगस्त को स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में अहम बैठक हुई। प्रदेश के विभिन्न कार्मिक और पेंशनर्स संगठनों के प्रतिनिधियों ने बैठक में एकजुट होकर योजना को पूरी तरह सीजीएचएस के अनुरूप लागू करने, अस्पतालों की मनमानी रोकने और कार्मिकों-पेंशनरों को निर्बाध कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की मांग रखी।
बैठक से पहले सचिवालय संघ ने विभिन्न कार्मिक संगठनों के साथ समन्वय कर सर्वसम्मति से एजेंडा तैयार किया था। इसमें अक्टूबर 2025 से राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण में लंबित चिकित्सा दावों का तत्काल भुगतान, बार-बार गैप फंडिंग की व्यवस्था समाप्त कर कार्मिकों के अंशदान के साथ राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त बजटीय प्रावधान, गोल्डन कार्ड को सीजीएचएस के अनुरूप लागू करना और राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण में शिकायत निवारण पोर्टल बनाने की मांग प्रमुख रही।
25 वर्ष से अधिक उम्र के आश्रितों को भी मिले सुविधा
कार्मिक संगठनों ने मांग की कि निर्धारित मानकों के तहत परिवार में 25 वर्ष से अधिक आयु के आश्रित सदस्यों को भी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ दिया जाए। अस्पतालों की ओर से उपचार और भुगतान के मामले में की जा रही मनमानी पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा ओपीडी से संबंधित विभिन्न मदों को भी कैशलेस करने की दिशा में ठोस कार्रवाई की मांग रखी गई।
बैठक में सचिवालय संघ समेत सभी संगठनों ने एकमत होकर कहा कि जब कार्मिकों और पेंशनरों से नियमित अंशदान लिया जा रहा है तो उन्हें गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी मिलनी चाहिए। संगठनों ने विशेष रूप से आयुष्मान योजना की तर्ज पर राज्य सरकार से अतिरिक्त बजटीय व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि गोल्डन कार्ड योजना धन की कमी के कारण प्रभावित न हो।
मंत्री ने माना, अतिरिक्त बजट की जरूरत
कार्मिक संगठनों ने बैठक में लंबित दावों, अस्पतालों की समस्याओं और योजना के संचालन से जुड़े तथ्यों को विस्तार से रखा। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त बजटीय व्यवस्था किए जाने और अस्पतालों की मनमानी पर प्रभावी अंकुश लगाए जाने की आवश्यकता को स्वीकार किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को अपेक्षित धनराशि का आकलन कर उसके आवंटन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य मंत्री ने गोल्डन कार्ड को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कार्मिक संगठनों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने के भी निर्देश दिए। ओपीडी की विभिन्न मदों को कैशलेस किए जाने के मुद्दे पर प्रमुख कार्मिक संगठनों के साथ दोबारा बैठक कर इसे अंतिम रूप देने के लिए अध्यक्ष, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण और सचिव, स्वास्थ्य को निर्देशित किया गया।
18 अगस्त तक जारी होगा बैठक का कार्यवृत्त
बैठक में लिए गए निर्णयों को लेकर भी सरकार ने समयसीमा तय की है। स्वास्थ्य मंत्री ने 18 अगस्त 2026 तक बैठक का कार्यवृत्त अनिवार्य रूप से जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही स्पष्ट किया गया कि बैठक में लिए गए निर्णयों को अंतिम रूप देने से पहले कार्मिक संगठनों को फिर विश्वास में लिया जाए। संबंधित अधिकारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर निर्णयों की अंतिम रूपरेखा तय करेंगे।
एक मंच पर आए कार्मिक और पेंशनर्स संगठन
बैठक में सचिवालय संघ और विभिन्न कार्मिक तथा पेंशनर्स संगठनों की ओर से दीपक जोशी, अरुण पाण्डे, राजेन्द्र रतूड़ी, राकेश जोशी, शक्ति प्रसाद भट्ट, मुकेश बहुगुणा, रविन्द्र सिंह राणा, इं. रमेश चन्द्र शर्मा, विनोद थापा, जगवीर सिंह खरोला, सुधा कुकरेती, सोबन सिंह रावत, अशोक राज उनियाल, अशोक चौधरी, डॉ. अंकित जोशी, सुमन सिंह बल्दिया, पंचम बिष्ट, संजय शर्मा, प्रमिला टम्टा, अतुल कुमार, रीना मखनवाल, सुरेन्द्र रावत, दिव्यांशु डोभाल, गिरीश भट्ट, आर.पी. पंत, चौधरी ओमवीर सिंह, धर्मेन्द्र रावत, सबर सिंह रावत और बनवारी लाल समेत अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे।
सचिवालय संघ ने कहा कि बैठक का उद्देश्य सभी कार्मिक संगठनों को एक मंच पर लाकर गोल्डन कार्ड की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना है। संघ का कहना है कि नियमित अंशदान लेने के बाद कार्मिकों और पेंशनरों को गुणवत्तापूर्ण, प्रभावी और निर्बाध कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।



