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अयोध्या में उत्तराखंड की एंट्री: श्रद्धालुओं के लिए बनेगा ‘अपना घर’, संस्कृति को मिलेगा राष्ट्रीय मंच

सचिव आवास ने निर्माण स्थल का जायजा लेकर जारी किए कड़े-दिशा निर्देश

Rajkumar Dhiman, Dehradun: धार्मिक पर्यटन के तेजी से बदलते परिदृश्य में अयोध्या अब सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि राज्यों के बीच सांस्कृतिक पहचान का नया मंच बनती जा रही है। इसी कड़ी में उत्तराखंड सरकार ने यहां अपना भव्य राज्य अतिथि गृह बनाने की पहल शुरू की है। यह परियोजना सिर्फ एक बिल्डिंग नहीं, बल्कि उत्तराखंड की मौजूदगी को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की रणनीतिक कोशिश मानी जा रही है। आवास व राज्य संपत्ति विभाग के सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने निर्माण स्थल का जायजा लेते हुए गुणवत्ता और समयबद्धता को लेकर कड़े निर्देश जारी किए।

तीर्थ से ‘टूरिज्म पावर’ तक, धामी सरकार का बड़ा विजन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी धार्मिक स्थलों को आर्थिक ताकत में बदलने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। चारधाम यात्रा में व्यवस्थाओं के सुधार के बाद अब सरकार दूसरे बड़े तीर्थ केंद्रों पर भी अपनी पहचान बनाने में जुटी है। अयोध्या में प्रस्तावित अतिथि गृह इसी विजन का विस्तार है, जहां आस्था, सुविधा और अर्थव्यवस्था एक साथ जुड़ते हैं।

लोकेशन ही बनाएगी गेम-चेंजर
अयोध्या-फैजाबाद हाईवे पर बनने वाला यह अतिथि गृह श्रीराम मंदिर से कुछ ही दूरी पर होगा। एयरपोर्ट, शहर और प्रमुख धार्मिक स्थलों से इसकी कनेक्टिविटी इसे खास बनाती है। यही कारण है कि यह सिर्फ ठहरने की जगह नहीं, बल्कि यात्रियों के लिए एक “स्ट्रैटेजिक बेस” बन सकता है।

अब अयोध्या में भी ‘अपना ठिकाना’
अब तक उत्तराखंड से आने वाले श्रद्धालुओं को अयोध्या में ठहरने के लिए निजी व्यवस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ता था। इस परियोजना के पूरा होने के बाद उन्हें एक सुरक्षित, भरोसेमंद और किफायती विकल्प मिलेगा—यानी अयोध्या में भी “अपना घर” जैसा एहसास।

सिर्फ गेस्ट हाउस नहीं, मिनी उत्तराखंड
सरकार इस परिसर को केवल रुकने की जगह नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है। यहां उत्तराखंड की लोक संस्कृति, संगीत, उत्सव और पारंपरिक मेलों की झलक देखने को मिलेगी। आसान शब्दों में कहें तो यह जगह अयोध्या में “मिनी उत्तराखंड” की तरह विकसित हो सकती है।

निरीक्षण के बाद प्रशासन सख्त मोड में
आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग के सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने निर्माण स्थल का जायजा लेकर साफ कर दिया है कि इस परियोजना में देरी या गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं होगा। अधिकारियों को समयबद्ध और उच्च गुणवत्ता के साथ काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

पर्यटन के साथ अर्थव्यवस्था को भी बूस्ट
अयोध्या में हर साल बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए यह परियोजना उत्तराखंड के लिए आर्थिक अवसर भी पैदा करेगी। यहां आयोजित कार्यक्रम, ठहराव और सांस्कृतिक गतिविधियां राज्य के लिए नए राजस्व स्रोत खोल सकती हैं।

‘सांस्कृतिक कनेक्ट’ की नई मिसाल
डॉ. आर. राजेश कुमार के मुताबिक, यह अतिथि गृह उत्तराखंड और अयोध्या के बीच एक सांस्कृतिक पुल की तरह काम करेगा, जहां श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी और राज्य की परंपराओं को राष्ट्रीय पहचान।

सिर्फ इमारत नहीं, पहचान की रणनीति
अयोध्या में बनने वाला यह अतिथि गृह उत्तराखंड सरकार की उस नई सोच का हिस्सा है, जिसमें धार्मिक पर्यटन को सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि पहचान और अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।

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