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बगल में थी वन चौकी और देवदार का विशाल पेड़ काट ले गए तस्कर, जंगल की रखवाली पर उठे सवाल

गोराघाटी में अवैध कटान से भड़के ग्रामीण, वन माफिया और विभागीय मिलीभगत के आरोप

Neeraj Uttarakhandi, Uttarkashi: जौनसार-बावर के घने देवदार जंगलों में वन माफिया के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका ताजा उदाहरण चकराता वन प्रभाग की रिखनाड रेंज स्थित गोराघाटी में सामने आया है। यहां वन चौकी से कुछ ही दूरी पर एक विशाल देवदार के पेड़ को बेखौफ तस्करों ने काट गिराया और वन विभाग को भनक तक नहीं लगी। घटना सामने आने के बाद जंगलों की सुरक्षा व्यवस्था और वन विभाग की चौकसी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब वन चौकी के बिल्कुल पास खड़ा बहुमूल्य देवदार सुरक्षित नहीं रह सका, तो दूरदराज के जंगलों की निगरानी किस भरोसे हो रही होगी। इस घटना ने स्थानीय ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश पैदा कर दिया है। ग्रामीण खुलकर वन माफिया और विभागीय कर्मचारियों की कथित मिलीभगत की आशंका जता रहे हैं।

जानकारी के अनुसार आरक्षित वन क्षेत्र गोराघाटी में करीब 30 से 40 मीटर ऊंचे देवदार के पेड़ को अवैध रूप से काट दिया गया। पहाड़ों में देवदार केवल लकड़ी नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और जल स्रोतों की सुरक्षा का आधार माना जाता है। ऐसे बहुमूल्य वृक्ष का इस तरह धराशायी होना वन विभाग की निगरानी व्यवस्था की पोल खोलता नजर आ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों में अवैध कटान लंबे समय से जारी है, लेकिन विभागीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। पुनाह पोखरी क्षेत्र पंचायत सदस्य सरदार सिंह चौहान, स्याणा विजयपाल सिंह, पूर्व प्रधान वीरेंद्र सिंह, अतर सिंह, जयपाल सिंह और संजय समेत कई ग्रामीणों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विभागीय लापरवाही या मिलीभगत के बिना इस तरह की घटना संभव नहीं हो सकती।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों को हक-हकूक के तहत मिलने वाली माफी लकड़ी समय पर उपलब्ध नहीं कराई जाती, जबकि दूसरी ओर वन तस्कर खुलेआम देवदार के पेड़ों पर आरा चला रहे हैं। उनका कहना है कि आम ग्रामीणों को नियमों के नाम पर परेशान किया जाता है, लेकिन वन माफियाओं पर कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है।

मामले ने तूल पकड़ा तो वन विभाग भी हरकत में आया। रिखनाड रेंज के रेंजर विनोद चौहान ने बताया कि विभागीय टीम ने मौके से एक आरा मशीन बरामद कर कब्जे में ले ली है। मामले में छुल्टाड़ निवासी राजपाल के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम के तहत नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है और जांच शुरू कर दी गई है।

प्रभागीय वनाधिकारी वैभव कुमार सिंह ने घटना का संज्ञान लेते हुए वनकर्मियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि अवैध कटान में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। यदि जांच में किसी कर्मचारी की लापरवाही या संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि जौनसार-बावर के देवदार वन केवल प्राकृतिक धरोहर ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की जलवायु, जल स्रोतों और स्थानीय लोगों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार हैं। ऐसे में वन चौकी के नजदीक देवदार का अवैध कटान यह साफ संकेत दे रहा है कि यदि समय रहते निगरानी व्यवस्था को मजबूत नहीं किया गया, तो वन माफिया आने वाले समय में इस बहुमूल्य वन संपदा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।

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